नुक्कड़ नाटक के ज़रिए छात्रों ने दिया संदेश: “मोबाइल को बनाएं औज़ार, न बनने दें अपनी जान का दुश्मन

(रौनक साहू)

​बलौदाबाजार। शुक्रवार को एक्स्ट्राआर्डिनरी  (EXTRAORDINARY) स्कूल के द्वारा स्थानीय क्षेत्रों में छात्रों द्वारा एक प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक (STREET THEATER)  का मंचन किया गया। इस नाटक का मुख्य उद्देश्य आधुनिक समाज में मोबाइल (MOBILE)  फोन के बढ़ते दुरुपयोग और उससे होने वाले घातक (FATAL)  परिणामों के प्रति लोगों को जागरूक करना था।

​नाटक में यह है मुख्य कार्य

छात्रों  (STUDENTS)  ने अपने दमदार अभिनय और संवादों के माध्यम से समाज के विभिन्न पहलुओं को छुआ: ​डिजिटल दूरी (DIGITAL DISTANCE) : नाटक में दिखाया गया कि कैसे एक ही घर में रहते हुए भी लोग मोबाइल में खोए रहने के कारण एक-दूसरे से मीलों दूर हो गए हैं। ​शिक्षा पर प्रभाव: छात्रों ने बखूबी दर्शाया कि कैसे गेमिंग (GAMING) और सोशल मीडिया (SOCIAL MEDIA)  की लत विद्यार्थियों की एकाग्रता और पढ़ाई  (STUDIES)  को नुकसान पहुँचा रही है।

​स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं: मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से आँखों पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव और मानसिक तनाव (MENTAL STRESS)  जैसे गंभीर विषयों (SUBJECTS)  पर भी प्रकाश डाला गया।

​दर्शकों ने की सराहना: ​नुक्कड़ नाटक को देखने के लिए भारी संख्या में लोग एकत्रित हुए। स्थानीय निवासियों और अभिभावकों (PARENTS)  ने बच्चों के इस प्रयास की जमकर प्रशंसा की। एक अभिभावक ने कहा, “आज के समय (TIME)  में जब छोटे बच्चे भी मोबाइल के बिना खाना नहीं खाते, ऐसे में इन छात्रों द्वारा दिया गया यह संदेश (MESSAGE)   समाज के लिए एक आँख खोलने वाला अनुभव है।

​स्कूल प्रशासन का संदेश

विद्यालय के प्राचार्या डॉ एकता शुक्ला (DR EKTA SHUKLA)  जी ने छात्रों के उत्साह की सराहना करते हुए कहा, “हमारा उद्देश्य (OBJECTIVE)  बच्चों को सिर्फ किताबी ज्ञान  (KNOWLEDGE)  देना नहीं, बल्कि उन्हें जागरूक नागरिक बनाना है। मोबाइल तकनीक (TECHNIQUE)  का उपयोग ज्ञान के लिए होना चाहिए, न कि समय बर्बाद करने के लिए। ​नाटक के अंत में सभी छात्रों और उपस्थित लोगों ने ‘डिजिटल अनुशासन’ बनाए रखने और मोबाइल का सीमित व सही उपयोग करने की शपथ ली।
कार्यक्रम (PROGRAM)  को सार्थक बनाने में शाला प्रशासन डायरेक्ट श्री अभिषेक तिवारी जी व श्री टूकेश्वर वर्मा जी का समर्थन सराहनीय रहा बच्चों में बढ़ते दुसप्रभावो को दूर करने की पहल सराहनीय रही वही शाला के शिक्षक शिक्षिकाओं का योगदान भी सराहनीय रहा

एक शिक्षक के कथन

हमारा कार्य केवल बच्चों को किताबी ज्ञान प्रस्तुत करना नहीं अपितु उन्हें वैचारिक और सामाजिक जिम्मेदारीओ से भी अवगत करना है, कार्य की सार्थकता में आकांशा मैम, सपना मैम, काजल मैम,लता मैम,सुशील सर, वैष्णो सर,हरीश सर और अन्य का सहयोग सराहनीय रहा l