रायपुर की प्यास बुझाने बालोद के किसानों की फसलें चौपट
(दीपक देवदास)
बालोद। महानदी प्रदाय नहर शाखा में मरम्मत कार्य के चलते देवरानी-जेठानी नाला से रायपुर नगर निगम को अत्यधिक पानी छोड़ा जा रहा है। इससे ग्राम पंचायत मुड़गहन के आश्रित ग्राम साल्हेभाट में तेज बहाव ने किसानों की खेती को तबाह कर दिया। खेतों में पानी भर गया, मेढ़ें बह गईं, रेत जमा हो गई और लगभग एक किमी क्षेत्र में जमीन का कटाव हो गया। कई खेत अब नाला बन चुके हैं, जिससे खेती योग्य भूमि बंजर होने का खतरा मंडरा रहा है। वहीं सिंचाई विभाग के साइड इंचार्ज, स्थल सहायक और पटवारी की लापरवाही सामने आ रही है। काम में घोर मनमानी नजर आ रही है। जिम्मेदार निरीक्षण में भी नहीं आ रहे हैं।
दरअसल, ग्राम पंचायत मुड़गहन के आश्रित ग्राम साल्हेभाट में महानदी प्रदाय नहर से हो रहे अत्यधिक जल प्रवाह ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। देवरानी-जेठानी नाला से पानी की आपूर्ति रायपुर नगर निगम को की जा रही है। रायपुर के लोगों को पानी पिलाने के लिए बालोद के किसानों की खेती चौपट की जा रही है। देवरानी-जेठानी नाला और साल्हेभाट नाला में तेज बहाव के कारण खेतों में पानी भर गया है, जिससे कई किसानों की फसल चौपट हो गई। इस मामले में साइड इंचार्ज, स्थल सहायक की लापरवाही सामने आई है। नेतृत्वकर्ता और स्थल सहायक बर्बादी का तमाशा देख रहे हैं।
“खेतों में रेत का ढेर, मेंढ बही, बंजर होती जमीन”
ग्रामीणों के अनुसार नहर की क्षमता से अधिक पानी छोड़े जाने के कारण खेतों की मेढ़ बह गई है। लगभग एक किलोमीटर क्षेत्र में जमीन का कटाव हो गया है। बहाव के साथ रेत भी खेतों में आ गई है, जिससे खेती योग्य जमीन बंजर होने का खतरा बढ़ गया है। किसानों का कहना है कि खेत पूरी तरह नाला बन गया है, जिससे उनकी जीविका पर संकट खड़ा हो गया है। किसानों का कहना है कि इसका मुआवजा उन्हें मिलना चाहिए। वहीं सबसे बड़ी बात यह है कि इंजीनियर युवराज देवांगन की देखरेख में पानी छोड़ा गया है यानी नेतृत्वकर्ता और साइड इंचार्ज है। वहीं स्थल सहायक पीताम्बर साहू है, जिन्हें लगातार निरीक्षण कर रिपोर्ट देनी है कि पानी सही जा रहा है कि नहीं…। वहीं आमीन कश्यप पटवारी है, जिन्हें नुकसान का आकलन करना है। किसान परेशान हैं और तीनों जिम्मेदार क्षेत्र से नदारद हैं।
“किसानों की फसल चौपट, खेत को नुकसान”
नहर के पानी से प्रभावित किसानों में जीवराखन कुर्रे, रामेश्वर कुर्रे, बृजलाल तारम, बोदलाहन यादव, रूपराम साहू, मोहित मंडावी सहित कई अन्य किसान शामिल हैं, जिनके खेतों में पानी भर गया है और मेढ़ बह गई है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि तेज बहाव के कारण कुछ मवेशियों के बह जाने की भी आशंका है। इस संबंध में ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग के उप-संभाग गुरूर को आवेदन देकर नहर में पानी का प्रवाह कम करने की मांग की है। आवेदन में उल्लेख किया गया है कि लगातार तेज बहाव के कारण किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
“नहर में 300 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा”
सिंचाई विभाग के एसडीओ ने बताया कि वर्तमान में 300 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, जो पहले 450 क्यूसेक था। उन्होंने कहा कि पानी की मात्रा पहले से कम की गई है, लेकिन रायपुर नगर निगम को भी पानी आपूर्ति करनी होती है, जिसके कारण पूरी तरह से पानी कम करने में दिक्कत आ रही है। उन्होंने यह भी बताया कि ग्रामीणों का आवेदन उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है और आगे आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। कुछ किसानों की धान और गेंहू की फसल खराब होने की शिकायत आई है। किसानों ने तत्काल पानी का स्तर नियंत्रित करने की मांग की है।

