तालाब बना आत्मनिर्भरता का आधार, वैज्ञानिक मत्स्य पालन से कामिनी की सालाना आय 2 लाख रुपये
एमसीबी। मेहनत, सही तकनीक और विभागीय मार्गदर्शन के जरिए सीमित संसाधनों को भी बेहतर आमदनी के साधन में बदला जा सकता है। इसकी प्रेरक मिसाल मनेन्द्रगढ़ विकासखंड के खोंगापानी की मत्स्य कृषक कामिनी रोहतिया हैं, जिन्होंने वर्ष 2022 में मत्स्य विभाग के सहयोग से करीब 1 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले तालाब में वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन शुरू किया। कभी मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर रहने वाली कामिनी के लिए यही तालाब अब आय का महत्वपूर्ण जरिया बन चुका है। वैज्ञानिक पद्धति से मत्स्य पालन और नियमित तालाब प्रबंधन के चलते उन्हें वर्तमान में करीब 2 लाख रुपये का वार्षिक लाभ मिल रहा है। वर्ष 2022 में नवीन तालाब निर्माण योजना के तहत उन्हें तालाब निर्माण का लाभ मिला था, जिसके बाद उन्होंने इसका उपयोग आजीविका के लिए करना शुरू किया। विभाग ने उन्हें मछली पालन की वैज्ञानिक तकनीक, तालाब प्रबंधन और मछलियों की देखभाल से जुड़ा तकनीकी मार्गदर्शन दिया।
कामिनी ने विभागीय सलाह के अनुसार तालाब में भारतीय प्रमुख कार्प यानी IMC प्रजाति की मछलियों का पालन शुरू किया और करीब 5 हजार फिंगरलिंग्स का स्टॉकिंग किया। मछलियों के बेहतर विकास के लिए वे पानी की गुणवत्ता की नियमित निगरानी, तालाब की साफ-सफाई और समय-समय पर जरूरी देखभाल पर विशेष ध्यान देती हैं। मछलियों में होने वाली संभावित बीमारियों की पहचान और रोकथाम के लिए भी उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त किया है। वैज्ञानिक प्रबंधन और नियमित मेहनत का परिणाम उनकी आय में साफ दिखाई दे रहा है। कामिनी के अनुसार मत्स्य विभाग से मिले तकनीकी मार्गदर्शन ने उन्हें तालाब प्रबंधन, मत्स्य बीज संचयन, मछलियों की देखभाल और उत्पादन बढ़ाने में काफी मदद की। अब उनका लक्ष्य मत्स्य उत्पादन और आय को और बढ़ाना है। गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज, बेहतर प्रबंधन और विशेषज्ञों की सलाह के जरिए वह अपने मत्स्य व्यवसाय को विस्तार देने की दिशा में प्रयास कर रही हैं।
कामिनी का अनुभव दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है। उनका कहना है कि उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग और वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर मत्स्य पालन को ग्रामीण परिवारों के लिए लाभदायक व्यवसाय बनाया जा सकता है। सरकारी योजनाओं का लाभ, विभागीय मार्गदर्शन और निरंतर मेहनत मिलकर आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार तैयार कर सकते हैं। कामिनी की सफलता यह दिखाती है कि सही योजना और तकनीक के साथ एक साधारण तालाब भी ग्रामीण परिवार की आय बढ़ाने और आत्मनिर्भरता हासिल करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।








