बस्तर में सिंचाई योजनाओं के नाम पर करोड़ों की बंदरबांट का आरोप, 90% बजट खर्च फिर भी जमीन पर नहीं दिखे काम
रायपुर। बस्तर संभाग में किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने और जल संरक्षण के उद्देश्य से जारी सरकारी बजट के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जल संसाधन विभाग में कथित अनियमितताओं और अधिकारियों-ठेकेदारों के गठजोड़ के जरिए सरकारी राशि के दुरुपयोग के आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप है कि विभाग में एक प्रभावशाली अधिकारी वेद प्रकाश पांडेय के संरक्षण में पूरा तंत्र काम कर रहा है। दावा किया जा रहा है कि स्वीकृत योजनाओं में से महज 10 प्रतिशत काम ही धरातल पर दिखाई दे रहे हैं, जबकि शेष 90 प्रतिशत बजट के उपयोग को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप विभागीय पदस्थापनाओं और प्रमोशन प्रक्रिया को लेकर हैं। आरोप है कि निर्धारित नियमों और वरिष्ठता को नजरअंदाज करते हुए डिप्लोमाधारी उप अभियंताओं को सहायक अभियंता के पद पर पदोन्नति मिलते ही सीधे कार्यपालन अभियंता (ईई) का प्रभार सौंप दिया गया।
दस्तावेजों के आधार पर सामने आए आरोपों के मुताबिक, बस्तर संभाग में किसानों की जरूरत के अनुरूप बड़ी सिंचाई परियोजनाएं विकसित करने के बजाय विभाग का अधिकांश ध्यान स्टॉप डैम और एनीकट निर्माण पर केंद्रित रहा है। इन निर्माण कार्यों में तकनीकी मानकों की अनदेखी और लागत का अनुमान बढ़ाकर तैयार किए जाने की आशंका जताई गई है।
स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि अरबों रुपये खर्च होने के बावजूद इन योजनाओं का लाभ किसानों और आम नागरिकों तक अपेक्षित रूप से क्यों नहीं पहुंच पा रहा है। आरोप है कि कई योजनाओं को सरकारी रिकॉर्ड में पूरा दर्शाया गया है, जबकि उनकी वास्तविक उपयोगिता और निर्माण गुणवत्ता की जांच की आवश्यकता है।
बस्तर संभाग में इंजीनियरों की पदस्थापना को लेकर भी विवाद सामने आया है। आरोप है कि कुछ संभागों को छोड़कर अन्य स्थानों पर पदोन्नति, वरिष्ठता और विभागीय नियमों को नजरअंदाज किया गया। स्नातक डिग्रीधारी इंजीनियरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से दूर रखते हुए डिप्लोमाधारी अधिकारियों को कार्यपालन अभियंता का प्रभार सौंपे जाने पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
बस्तर के तत्कालीन कमिश्नर मनोज पिंगुआ ने शासन को पत्र लिखकर नक्सल प्रभावित और संवेदनशील बस्तर संभाग में महत्वपूर्ण पदों पर योग्य, ऊर्जावान और ईमानदार अधिकारियों की नियुक्ति पर जोर दिया था। इसका उद्देश्य क्षेत्र के विकास कार्यों को बेहतर ढंग से संचालित करना था।
हालांकि, जल संसाधन विभाग की मौजूदा पदस्थापना व्यवस्था को लेकर आरोप लग रहे हैं कि इन निर्देशों और प्रशासनिक मंशा के अनुरूप काम नहीं किया जा रहा है। सीधे भर्ती के जरिए नियुक्त अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से दूर रखने और पसंदीदा अधिकारियों को पदस्थ करने के आरोप भी सामने आए हैं।
वर्ष 2024 में भारत कुमार को सहायक अभियंता के पद पर पदोन्नत किया गया था। आरोप है कि पदोन्नति के तुरंत बाद उन्हें जगदलपुर के टीडीपीपी संभाग में सीधे कार्यपालन अभियंता की जिम्मेदारी दे दी गई। इस पदस्थापना को लेकर भी विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप लगाने वालों का दावा है कि महत्वपूर्ण पदों पर इस तरह की नियुक्तियों से विभाग में चल रही कथित अनियमितताओं पर पर्दा डालने में मदद मिली।
कांकेर और दंतेवाड़ा संभाग में पदस्थ स्नातक डिग्रीधारी इंजीनियरों को लेकर भी विवाद सामने आया है। आरोप है कि विभाग के प्रभावशाली अधिकारी अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर इन इंजीनियरों के खिलाफ जांच के आदेश जारी कर रहे हैं। इसे कथित सिंडिकेट के खिलाफ आवाज उठाने वाले अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
बस्तर संभाग में सिंचाई योजनाओं के बजट और विभागीय पदस्थापनाओं को लेकर उठे सवालों के बाद स्थानीय लोगों और कुछ ठेकेदारों के एकजुट होने की चर्चा है। बताया जा रहा है कि कथित अनियमितताओं, निर्माण कार्यों और नियुक्तियों से संबंधित दस्तावेजों के साथ शासन तथा उच्च स्तरीय जांच एजेंसियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है।
यदि इन आरोपों की स्वतंत्र जांच होती है, तो सिंचाई परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति, बजट के उपयोग, निर्माण की गुणवत्ता और अधिकारियों की भूमिका से जुड़े कई तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल पूरे मामले में संबंधित विभाग और अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

