जनसमस्या निवारण शिविर में जिला पंचायत सभापति की उपेक्षा, जिले के जनप्रतिनिधि नाराज
(दीपक देवदास)
बालोद। बालोद जिले के गुरुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत अरमरीकला में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर विवादों के घेरे में आ गया है। शिविर के दौरान अधिकारियों द्वारा निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, खासकर जिला पंचायत सभापति लक्ष्मी अशोक साहू की कथित उपेक्षा का मामला स्थानीय स्तर पर सुर्खियों में है। इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, जनसमस्या निवारण शिविर में क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधि अपने-अपने मुद्दे रख रहे थे। जिला पंचायत सभापति लक्ष्मी अशोक साहू भी शिविर में मौजूद थीं। हालांकि, अन्य जनप्रतिनिधियों को मंच पर बोलने का पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद जिला पंचायत सभापति को अपनी बात रखने का मौका ही नहीं दिया गया। उनकी अनदेखी और अपमान को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जिला पंचायत सभापति जैसे उच्च पद पर आसीन निर्वाचित प्रतिनिधि के साथ इस तरह का व्यवहार न केवल अनुचित है, बल्कि अफसरों की लापरवाही को दर्शा रहा है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधि का आरोप लगाया कि अफसरों ने जानबूझकर सभापति की उपेक्षा की, जिससे क्षेत्र में शासन के प्रति नाराजगी बढ़ गई है।
जनप्रतिनिधियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण
बता दें कि जनसमस्या निवारण शिविर का मुख्य उद्देश्य आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान करना होता है। ऐसे शिविरों में जनप्रतिनिधियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि वे जनता की समस्याओं से सबसे अधिक परिचित होते हैं। यदि इन प्रतिनिधियों को ही अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया जाएगा, तो शिविर का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।
जनप्रतिनिधियों का अपमान कर रहे अफसर
बालोद भाजपा जिलाध्यक्ष चेमनलाल देशमुख ने कहा कि जनपद पंचायत सीईओ सरासर झूठ बोल रहे हैं। शिकायत मिलने के बाद हमने क्षेत्र की जनता और जनप्रतिनिधियों से वास्तविक स्थिति की जानकारी ली है। अफसरों ने जिला पंचायत सभापति लक्ष्मी अशोक साहू को उद्बोधन के लिए बुलाया ही नहीं है। यह स्थानीय जनप्रतिनिधियों का सीधा अपमान है। प्रशासनिक अफसर अपनी मनमर्जी कर रहे हैं और यह कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। देशमुख ने कहा कि अफसरों के इस तरह के रवैय्ये और लाल फीताशाही की शिकायत मंत्रालय और मंत्री स्तर पर कर कार्रवाई की मांग करेंगे। वहीं इस मामले में जिला पंचायत अध्यक्ष तारिणी पुष्पेंद्र चंद्राकर से फोन पर संपर्क किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया।
जिला प्रशासन एवं जनपद पंचायत गुरुर के सीईओ द्वारा उनकी अनदेखा की गई, जबकि वे क्षेत्र की प्रमुख जनप्रतिनिधि हैं और स्थानीय समस्याओं से भली-भांति परिचित हैं। प्रशासनिक अफसरों का रवैय्या जनप्रतिनिधियों के साथ ऐसा है तो आम आदमी के साथ कैसे होगा समझा जा सकता है।
–लक्ष्मी अशोक साहू, सभापति व जिला पंचायत सदस्य
जिला पंचायत सभापति लक्ष्मी अशोक साहू का नाम दो बार एलाऊसमेंट किया गया था। वे उस समय वहां मौजूद ही नहीं थीं। जन समस्या निवारण शिविर का यह कार्यक्रम नोडल अधिकारी के मार्गदर्शन में हुआ है। कहीं कोई अपमान जैसी बात ही नहीं है।
–उमेश रात्रे, सीईओ, जनपद पंचायत, गुरुर
शिविर में कलेक्टर, एडीएम सहित सभी वरिष्ठ अफसर मौजूद थे। मुझे इस मामले में कोई टिप्पणी नहीं करनी नहीं है।


