डॉ.वर्षा शेखर शर्मा को विद्यावाचस्पति सम्मान, माँ गंगा के तट पर विराजमान माँ संस्कृत का सम्मान
(हेमंत बघेल)
कसडोल। देवभूमि उत्तराखंड की पवित्र नगरी हरिद्वार के गंगा तट पर 10 अक्टूबर को एक अजीब संयोग हुआ।सर्वभाषाओ की जननी मांँ संस्कृत के घर उत्तराखंड संस्कृत अकादमी परिसर में बिहार की धरती से बेटी हिंदी, विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ के रूप में न सिर्फ पधारी बल्कि पहले मांँ संस्कृत को आत्मसात किया और फिर देशभर से आएं संस्कृत और हिंदी सेवियों का पलक पावड़े बिछाकर अभिनन्दन किया। गौरतलब है कि सन 800 ईसवी में स्थापित इस पुरातन हिंदी विश्वविद्यालय को वर्तमान में विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ के रूप में जाना जाता है।उत्तराखंड शासन के संस्कृत शिक्षा निदेशक डॉ आनन्द भारद्वाज की मेजबानी में विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ भागलपुर ,बिहार का वार्षिक अधिवेशन व सम्मान समारोह उत्तराखंड संस्कृत अकादमी हरिद्वार के आडिटोरियम में किया गया। संस्था के उपकुलसचिव डॉ प्रेमचंद पांडेय के संचालन में मुख्य अतिथि उत्तराखंड सरकार के राज्य मंत्री श्यामवीर सैनी रहे। जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में देहरादून ब्रह्माकुमारीज सब जोन इंचार्ज राजयोगिनी बीके मंजू दीदी ने भागीदारी की।विद्यापीठ के कुलपति डॉ दयानन्द जायसवाल, माउंट आबू ब्रह्माकुमारीज मुख्यालय से पधारे प्रोफेसर सतेंद्र भाई,दिल्ली से आए डॉ विनोद बब्बर ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर अधिवेशन का आगाज़ किया।रुड़की
गीतकार अनिल अमरोही ने सरस्वती वंदना व विद्यापीठ का कुलगीत तथा डॉ वर्षा शर्मा ने ऐतिहासिक गीत में संस्कृत की महिमा का बखान करके वाहवाही बटोरी,वहीं अपने स्वागत उदबोधन में उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के सचिव व संस्कृत शिक्षा निदेशक डॉ आनन्द भारद्वाज ने कहा कि संस्कृत भाषाओं की जननी है तो हिंदी उसकी बेटी और आज हिंदी रूपी बेटी विद्यापीठ के रूप में अपनी मांँ संस्कृत से मिलने भागीरथी नगरी हरिद्वार पधारी है। उपकुलसचिव डॉ गोपाल नारसन ने विश्वविद्यालय का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।इस पवित्र धरा पर मां सरस्वती के पुत्र व पुत्रियों को विद्या वाचस्पति सम्मान और सारस्वत सम्मान मिलना बेहद सुखद रहा। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ की दोनों ही बेटियाँ (पिता – लक्ष्मीचंद शर्मा पटाक) श्रीमती वंदनागोपाल शर्मा “शैली” को सुदीर्घ हिंदी सेवा और श्रीमती वर्षा शेखर शर्मा को सुदीर्घ संस्कृत सेवी सारस्वत साधना कला के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ ,शैक्षिक प्रदेयों,महनीय शोधकार्य तथा राष्ट्रीय /अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा के आधार पर इस विद्यापीठ की अकादमिक परिषद की अनुशंसा पर विद्यावाचस्पति मानद भूषण से सम्मानित किया गया।राज्य मंत्री श्यामवीर सैनी ने हिंदी सेवा के लिए विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ को भारत का गौरव बताया तो विशिष्ट अतिथि राजयोगिनी बीके मंजु दीदी ने आत्म स्वरूप में रहकर परमात्मा तक पहुंचने की राजयोग विधा की जानकारी दी।
इस अवसर पर कार्यक्रम में देहरादून से आए कुंवर राज आस्थाना, छत्तीसगढ़ से साहित्यकार और परामर्शदाता वन्दनागोपाल शर्मा “शैली”, और व्याख्याता वर्षा शेखर शर्मा,करनाल से रमेश सैनी,मुजफ्फरनगर से सविता वर्मा गज़ल, पूर्व प्रधानाचार्य घनश्याम गुप्ता,पूर्व प्रधानाचार्य अशोक शर्मा आर्य,नवीन शरण निश्चल,अजय शर्मा,प्राचार्य हेमंत तिवारी, मनु शिवपुरी, बीके सुशील भाई,बीके मीना दीदी व बीके गीता दीदी,अकादमी के शोध अधिकारी हरिश्चंद्र गुरुरानी,किशोरी लाल रतूड़ी,आचार्य भानुमित्र शर्मा समेत संस्कृत हिंदी के नामचीन साहित्यकारों ने संस्कृत – हिंदी के इस मिलन को एक ऐसा यज्ञ बताया जिसकी सुगन्ध देर तक देश दुनिया मे रहेगी। इस बड़ी उपलब्धि पर कसडोल सहित जिले के सर्व सामाजिक संगठनों ने एवं साहित्य प्रेमियों ने बधाई प्रेषित की हैं।









