युक्तियुक्तकरण से पहले पदोन्नति करे सरकार, विसंगति पूर्ण युक्तियुक्तकरण मंजूर नहीं – विक्रम राय

(नीलकमल आजाद)

पलारी। वर्तमान में शासन के मंशानुरूप प्रशासन के द्वारा बड़े ही जोर शोर से युक्तियुक्तकरण करने की तैयारी की जा चुकी है अगर ऐसे ही मुस्तैदी प्रशासन पदोन्नति के लिए दिखाती तो आज युक्तियुक्तकरण करने की जरूरत ही नहीं पड़ती। वर्तमान में जो नियम बनाए हैं उसमें प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक की गुणवत्ता को समाप्त किया जा रहा है । शासन को चाहिए की सभी प्राथमिक स्कूलों में कम से कम पांच शिक्षक की नियुक्ति अनिवार्य रूप से करें जिससे बच्चों में शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़े। चुकी प्राथमिक विद्यालय बच्चों की शिक्षा की नीव है। क्या शासन और प्रशासन मिलकर गरीब, किसान और मजदूर के बच्चों को गुणवत्तायुक्त शिक्षा नहीं देना चाहती? क्या सेटअप को बदलकर प्राइवेट स्कूलों को बढ़ावा देना चाहती है? क्या शिक्षा का व्यवसाय कारण किया जा रहा है? यह गंभीर प्रश्न इस युक्तियुक्तकरण में दिखाई दे रहा है अगर पदोन्नति से पहले युक्तियुक्तकरण करते हैं तो प्राथमिक स्कूलों में और शिक्षकों की कमी हो जाएगी जिससे बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी। शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना शासन और प्रशासन की पहली प्राथमिकता है। 2020 नई शिक्षा नीति में भी यह कहा गया है की प्राथमिक विद्यालयों में कम से कम 3 शिक्षक अनिवार्य रूप से हो।बच्चों की शिक्षा गुणवत्ता पूर्ण हो और प्राथमिक स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक हो। लेकिन जिस तरह से छत्तीसगढ़ शासन और प्रशासन शिक्षकों और विद्यालयों का युक्तियुक्तकरण कर रही है उससे ऐसा लगता है की छत्तीसगढ़ की शिक्षा को पूरी तरीके से समाप्त करना चाह रही है। मोदी की गारंटी में 35000 शिक्षकों की नियुक्ति का वादा किया गया था। सभी कर्मचारियों को समय सीमा में महंगाई भत्ता देना शायद सरकार इन वादो को भूल ही गई है। शिक्षकों की नियुक्ति को छोड़कर युक्तिकरण कर रही है सेटअप 2008 के अनुसार सभी प्राथमिक विद्यालयों में कम से कम तीन शिक्षक और एक हेड मास्टर अनिवार्य थे लेकिन वर्तमान में जो युक्तीयुक्तकरण किया जा रहा है उसमें 60 या उससे कम दर्ज संख्या पर सिर्फ दो शिक्षकों की नियुक्ति की जा रही है। मैं मांग करता हूं कि सभी प्राथमिक स्कूलों में कम से कम पांच शिक्षक हो, पूर्व माध्यमिक विद्यालय में प्रधान पाठक + 4 शिक्षक अनिवार्य हो और युक्तियुक्तकरण से समन्वयको को मुक्त रखा जाए। इसी बीजेपी की शासन ने 2014 में युक्तियुक्तकरण किया था जिसमें समन्वयको को युक्तियुक्तकरण से मुक्त रखा था।



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