ईंट भट्टा मजदूरों के ठेकेदारों और विभागों को सौंपा गया ज्ञापन

(पंकज कुर्रे)
रायपुर । बिलाईगढ़/सारंगढ़/बलौदाबाजार/महासमुंद एवं अन्य प्रमुख जिलों का किया गया दौरा, ईंट भट्टों पर पलायन करने वाले मजदूरों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को लेकर सेन्टर फॉर लेबर रिसर्च एण्ड एक्शन, राजस्थान और हक सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स, दिल्ली के कार्यकर्ताओं ने छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों का दौरा किया।
इस दौरान सेन्टर फॉर लेबर रिसर्च एण्ड एक्शन संस्था से अभिषेक फ्रांसिस, छोटूसिंह रावत तथा हक सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स, दिल्ली से सुभांगी शर्मा और स्नेहा भाटी मौजूद रहे। टीम ने मजदूरों, सरदारों, स्थानीय संस्थाओं और ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों से मुलाकात कर समस्याओं की जानकारी ली। इसके बाद मजदूरों को ईंट भट्टों पर भेजने वाले सरदारों को ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन में मांग की गई कि मजदूरों को ट्रेन से रिजर्वेशन कराकर भेजा जाए। ईंट भट्टों पर स्वच्छ पानी, बिजली और शौचालय की व्यवस्था की जाए। मजदूर अपने और बच्चों के सभी दस्तावेज साथ रखें, ताकि प्रवास के दौरान उन्हें सरकारी योजनाओं और शिक्षा का लाभ मिल सके। ग्राम पंचायतों में संस्था ने सरपंचों से चर्चा कर कहा कि मजदूरों को ले जाने वाले सरदारों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पाबंद किया जाए।
संस्था ने मजदूरों को भी समझाया कि वे भट्टा मालिकों और सरदारों से अपनी सुविधाओं के लिए बात रखें। टीम ने स्कूलों और आंगनबाड़ियों का दौरा कर सुझाव दिया कि पलायन करने वाले बच्चों की टीसी (ट्रांसफर सर्टिफिकेट) और महिलाओं-बच्चों के आंगनबाड़ी संबंधी दस्तावेज भी साथ भेजे जाएं, ताकि राजस्थान प्रवास के दौरान बच्चों की पढ़ाई और पोषण बाधित न हो।
संस्था प्रतिनिधियों ने महासमुंद जिले में शिक्षा विभाग, श्रम विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग से भी मुलाकात की। अधिकारियों से कहा गया कि राजस्थान के ईंट भट्टों पर मजदूर और उनके बच्चे लगभग आठ माह तक शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित रहते हैं। वहां पानी, बिजली और शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं होती तथा मजदूरों को लंबी दूरी तक जनरल ट्रेन से सफर करना पड़ता है।
इस दौरे में रामेश्वर कुर्रे और वीरेंद्र रत्नाकर का सहयोग रहा।