स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सेजेस बिलाईगढ़ में शान से लहराया तिरंगा, बच्चों ने सलामी देकर राष्ट्रीय ध्वज का बढ़ाया मान

(करन साहू)
BILAIGARH। आज स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर नगर के विभिन्न स्थानों में ध्वजारोहण किया गया, जिसमें नगर स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी एवम हिन्दी माध्यम विद्यालय बिलाईगढ़ में भी शान से तिरंगा फहराया गया। यहाँ ध्वजारोहण का कार्यक्रम शाला प्रबंधन एवम विकास समिति के अध्यक्ष माननीय प्रभाकर कर्ष के कर कमलों से सम्पन्न हुआ, वहीं इस मौके पर शाला प्रबंधन एवं विकास समिति के सदस्य एवं अधिवक्ता/नोटरी माननीय रामनारायण भट्ट तथा पालकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। ध्वजारोहण के बाद कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय प्रभाकर कर्ष ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि हम लम्बे समय से गुलामी की बेड़ियों में जकड़े हुए थे फिर 15 अगस्त 1947 को नेताओं के बलिदान और त्याग के पश्चात हमें यह आजादी मिली है, इसे हमें अक्षुण्ण बनाए रखना है। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि माननीय रामनारायण भट्ट ने आजादी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए हमारे महापुरुषों के योगदान का स्मरण कराया। इस अवसर पर उन्होंने एक दिल को छू लेने वाली दर्दीली देशभक्ति गीत गाकर उपस्थित समस्त लोगों का मन मोह लिया एवं इस गीत के माध्यम से हमारे शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सेजेस बिलाईगढ़ के प्राचार्य नरेन्द्र कुमार साहू ने स्वतंत्रता का पर्याय एवं आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए समस्त समुदाय से आव्हान किया कि छात्र-छात्राओं की शिक्षा के क्षेत्र में आने वाली समस्त बाधाओं का निराकरण कर बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने में यदि कोई कसर रह जाती है, तो उसका समाधान सामूहिक सहयोग से किया जाए। प्राचार्य महोदय ने कहा कि बच्चों को अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराना ही उनकी पहली प्राथमिकता है। ध्वजारोहण के पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में शाला प्रबंधन एवं विकास समिति के अध्यक्ष प्रभाकर कर्ष, सदस्य रामनारायण भट्ट, पूर्व प्राचार्य रामलाल टण्डन, पालक एवं पत्रकार राजकुमार जांगड़े, संस्था के प्राचार्य नरेन्द्र साहू,अंग्रेजी एवम हिन्दी माध्यम के शिक्षक/शिक्षिकाएँ, छात्र-छात्राएं एवं पालकगण उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन दुर्गेश टण्डन (व्याख्याता) तथा ईशिता चन्द्रा (व्याख्याता) ने तथा आभार प्रदर्शन वरिष्ठ व्याख्याता ईश्वर प्रसाद साहू द्वारा किया गया।
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