सिद्ध खोल जलप्रपात बना आकर्षकण का केंद्र, यहां का मनोरम दृश्य और खूबसूरती पर्यटकों को लुभा रहा

(रौनक साहू)

कसडोल। एक ऐसा नजारा जिसे देखकर प्राकृतिक के गोद में समाने का मन करेगा। एक ऐसा नजारा जहां आकर वहीं का हो जाने का मन करेगा। प्रकृति से मन मोह लेने वाला मनोरम दृश्य है। प्रकृति का ऐसा दृश्य जो जन्नत से कम नहीं है, चारों तरफ खामोशी और प्रकृति का सौंदर्य रूप पर्यटकों का मन मोह लेता हैं। वनों से आच्छादित है ये दुनिया यहां आने वाले पर्यटक खूबसूरत वादियों में खो जाते है। कसडोल मुख्यालय से 10 किलोमीटर की दूरी में स्थित है सिद्ध खोल जलप्रपात, जो अपने मनोरम दृश्य और खूबसूरती से पर्यटकों को लुभाती है, 40 फीट की ऊंचाई से गिरता जलप्रपात पर्यटकों के देखना का बेहद खूबसूरत नजारा है। सिद्ध खोल जलप्रपात को सिद्धबाबा के नाम से भी जाना जाता है, जलप्रपात का आनंद लेने पर्यटक जिले के आलावा हजारों की संख्या में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से इसे देखने आते है। सिद्ध खोल जलप्रपात घने जंगल के बीच स्थित है। सिद्ध खोल जलप्रपात के आस पास घने वन उसके प्रकृति खूबसूरती को और बढ़ा देती है, खासकर बरसात के दिनों में जलप्रपात की खूबसूरती सौ गुना बढ़ जाती है और बस पर्यटक यहां खिंचे चले आते हैं।


“वॉच टावर से दिखता है दृश्य”

यहां पर्यटकों की सुविधा के लिए कन विनाग द्वारा वाच टावर और छाया के लिए कुटी बनाया गया है. सुरक्षा के लिए चारों तरफ से काटा तार लगाय गया है। वाच टावर में चढ़ कर चारों तरफ का नजारा का आप आनंद उठा सकते हैं. यहां एक मंदिर भी है. जहां लोग पूजा भी करते हैं और भगवान सिद्धबला का आशीर्वाद लेते हैं। 40 फीट की ऊंचाई से गिरता यह झरना कुदरत का अदभूत नजारा है। सिद्ध बोल जलप्रपात परिवारिक पिकनिक स्पॉट है. साल मर यहां पर्यटक बड़ी संख्या में पिकनिक मनाने आते हैं, कुछ पर्यटक सेल्फी लेने के लिए जलप्रपात के किनारे आ जाते हैं जो खतरों से खाली नहीं है। हालांकि यहां कुछ ऐसे मी पर्यटक आते हैं जो शराब का सेवन कर गंदगी फैलाते हैं। पर्यटकों की हमेशा से मांग रही है कि पर्यटकों की सुरक्षा के लिए पुलिस और वन विभाग के कर्मचारियों की तैनाती जरूरी है। लेकिन अभी तक इस पर अमल नहीं हो सका है।

“सीसी सड़क का हुआ था निर्माण”

पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वन विभाग द्वारा झरने तक पहुंचने के लिए लगभग एक किलोमीटर लंबी सीसी सड़क का निर्माण कराया गया है। इसके साथ ही पर्यटकों के लिए एक ऊंचा वॉच टावर बनाया गया है, जहां से पूरे झरने और आसपास के प्राकृतिक सौंदर्य का मनोरम दृश्य देखा जा सकता है।पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यहां छोटे-छोटे कॉटेज और शेड भी बनाए गए हैं, जहां लोग बैठकर आराम कर सकते हैं और भोजन भी बना सकते हैं। अचानक बारिश होने की स्थिति में भी इन शेडों के कारण पर्यटकों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। इधर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी वन विभाग पूरी तरह सतर्क है। विभाग के कर्मचारी लगातार क्षेत्र में गश्त कर रहे हैं और पर्यटकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की समझाइश दे रहे हैं, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।

“वन प्रबंधन समिति के रही देख रेख”

वहीं वन प्रबंधन समिति कुकरीकोना द्वारा झरने के प्रवेश द्वार पर बैरियर लगाकर प्रत्येक पर्यटक से 10 रुपये का प्रवेश शुल्क लिया जाता है। इस राशि का उपयोग सिद्ध बाबा झरना परिसर की साफ-सफाई, रखरखाव और पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में किया जाता है, जिससे पर्यटकों को स्वच्छ और सुरक्षित पर्यटन स्थल उपलब्ध हो सके।

इनका कहना है…

सिद्धखोल जलप्रपात को इकोटूरिज्म के तर्ज पर विकसित करने के लिए प्रयास किया जा रहा है, लगातार प्रपोजल विभाग द्वारा बनाया जा रहा है, अभी उक्त जगह पर वन प्रबंधन समिति द्वारा देखरेख किया जा रहा है, सभी पर्यटकों से 10 रुपए लिया जा रहा है, साथ ही वन प्रबंधन समिति की आय बढ़ाने बाबत दोना पत्तल भी बनाया जायेगा। साथ ही शौचालय और पानी की भी व्यवस्था किया गया है, जिससे पर्यटकों को किसी तरह की समस्याओं का सामना नहीं करना पड़े।

राजेश्वर नामदेव

रेंजर, सोनाखान रेंज

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