सतनामी समाज के गौरव स्वतंत्रता सेनानी श्रद्धेय स्व रेशमलाल जांगड़े जी–मोहन बंजारे 

प्रथम सांसद स्व रेशमलाल जांगड़े जी को जयंती पर कोटि-कोटि नमन

महान विभूति स्व.रेशमलाल जांगड़े के सम्मान में छग किसी संस्थान का नामकरण कर छग के पाठ्यक्रम में भी शामिल किया जाएं

मदन खाण्डेकर

रायपुर। अविभाजित मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ से सात बार के सांसद रहें देश के अन्तरिम सरकार में मनोनीत सांसद सदस्य, स्वतंत्रता सेनानी सतनामी समाज के प्रथम अधिवक्ता समाज सुधारक, अस्पृश्यता निवारण बिल के ड्राफ्टिंग कमेटी के सदस्य स्व रेशमलाल जांगड़े जी को जन्म जयंती पर कोटि कोटि नमन विनम्र श्रद्धांजलि। कहीं हम अपने समाज के गौरवशाली इतिहास एवं व्यक्तित्व को भूल न जाएं।।कृतक्ष छत्तीसगढ़ प्रदेश एवं समाज जयंती पर नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

बहुत ही सरल सहज व्यक्तित्व के धनी सादगी एवं छत्तीसगढ़ में राजनीति के संत कहे जाने वाले स्वतंत्रता सेनानी श्रद्धेय स्व रेशमलाल जांगड़े जी का जन्म 15फरवरी 1925 को अविभाजित मध्यप्रदेश के रायपुर जिला बिलाईगढ़ ब्लाक बलौदा बाजार तहसील के एक छोटे से गांव परसाडीह में हुआ था। उनके पिता का नाम टीकाराम जांगड़े तथा माता का नाम श्रीमती गंगा मती जांगड़े थी।गांव में नहीं होने के कारण प्रारंभिक शिक्षा उपरांत रायपुर में लारी स्कूल में पढ़ाई किए। देश प्रेम से ओतप्रोत बालक रेशमलाल जांगड़े स्वतंत्रता आंदोलन भारत छोड़ो आंदोलन से प्रभावित होकर आंदोलन में कूद पड़े जिसके कारण 1942मे जेल जाना पड़ा। उन्होंने छत्तीसगढ़ महाविद्यालय रायपुर से स्नातक किए। उन्होंने 1949 में ला कालेज नागपुर से विधि स्नातक तक पढ़ाई करने के साथ ही सतनामी समाज के प्रथम विधि स्नातक होने का गौरव हासिल किया। सन् 1950से1952तक देश के अंतरिम सांसद के सदस्य मनोनीत किए गये। स्वतंत्र भारत के प्रथम आमचुनाव 1952में वें कांग्रेस से बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र से 25 वर्ष के उम्र में ही सांसद निर्वाचित हुए।1957में फिर से बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद निर्वाचित हुए। सन्1956 में लोकसभा में सर्व प्रथम अलग छत्तीसगढ़ राज्य की अवधारणा रखी ‌।पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय के स्थापना के लिए अनेकों बार विधानसभा में प्रश्न उठाया और मांग किया। वें छत्तीसगढ़ के लिए अनेकों रेल परियोजना के साथ सिंचाई के लिए बांध बनवाएं। संचार के क्षेत्र में डाक विभाग के अनेकों काम किए।सन 1962मे भटगांव से मध्यप्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए।1972में फिर से भटगांव से विधायक बनें।।80के दशक में वे भाजपा में सामिल हो गया।वह 1985में भटगांव विधानसभा से भाजपा से मध्यप्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए।वे लोकसभा एवं मध्यप्रदेश विधानसभा में विभिन्न समितियों में अध्यक्ष एवं सदस्य के रुप जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।वे लोकसभा के प्रथम सदस्य के रूप में अनुसूचित जाति वर्ग के हित में बहुत काम किए। ममतामई मिनी माता के साथ मिलकर लोकसभा में अस्पृश्यता निवारण बिल पेश कराकर छुवाछूत से मुक्ति दिलाने पहल किया।वे समाज के बच्चो को उच्च शिक्षा मिल सकें इसके लिए 50से अधिक छात्रावास संचालित कर अपने सांसद के वेतन से बच्चों को पुस्तक कापी पेन उपलब्ध कराकर सहयोग किया और उन विद्यार्थियों को काबिल बनाया।आज उनके अनुयाई कई पडे पदों में सेवाएं दे रहे हैं।उन्होंने निःस्वार्थ भाव से समाज की सेवा किया। अनेकों लोगों को नौकरियां दिलवाई तत्कालीन समय में मालगुजारों द्वारा सतनामी समाज के जमीन खेत को जबरन कब्जा कर लेते थे उनके विरोध में आंदोलन चलाया और उनसे मुक्ति दिलाएं।समाज में व्याप्त अशिक्षा, व सामाजिक कुरीतियां को दूर करने पैदल अभियान चलाकर जन जागरुकता फैलाई। छूवाछूत के खिलाफ काम किया।बाबा गुरू घासीदास दास जी के विचारों को जन जन तक पहुंचाने के लिए बाबा गुरू घासीदास जी के जन्म एवं कर्मभूमि गिरौदपुरी धाम में मेला लगवाकर उनका अगुवाई किया।वे गिरौदपुरी मेला कमेटी के अध्यक्ष भी रहे। उनके समय गिरौदपुरी धाम मेला का काफी प्रचार प्रसार हुआ।गांव-गांव पैदल यात्रा कर गुरु घासीदास जी के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का अथक प्रयास कर गिरौदपुरी का भी प्रचार प्रसार किया।गिरौदपुरी मेला को बढ़ाने एवं उनके विकास में स्व रेशमलाल जांगड़े जी का अमूल्य योगदान रहा है।स्वतंत्रता सेनानी सतनामी समाज के जननायक स्व रेशमलाल जांगड़े जी अपने जीवन काल में चार बार सांसद एवं तीन बार विधायक सहित अंतरिम सांसद सदस्य व संविधान सभा के सदस्य भी रहें है। 1967में मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री बनें,वे भातृसंघ के उपाध्यक्ष, मप्र राज्य परिवहन निगम के चेयरमैन व मध्य प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष भी रहें। छत्तीसगढ़ प्रदेश एवं सतनामी समाज के लिए अनेकों काम किए हैं।वे सादा जीवन उच्च विचार के प्रबल पक्षधर थे। उन्होंने समाज के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। इतने-इतने बार सांसद एवं विधायक रहकर भी अपने परिवार के लिए कुछ नहीं बनाया। उनके सादगी पूर्ण जीवन के लिए उन्हें छत्तीसगढ़ के राजनीति का संत कहा जाता है छत्तीसगढ़ सरकार ऐसे महान विभूति को उपेक्षित न रखकर उनके नाम से कोई संस्थान का नामकरण कर छत्तीसगढ़ के पाठ्यक्रम में भी शामिल कर सम्मान करें । प्रगतिशील छग सतनामी समाज के प्रदेश महासचिव मोहन बंजारे ने राज्य सरकार से हमारे मांग करते हुए कहा कि उनके जीवन संघर्षों को छत्तीसगढ़ के पाठ्यक्रम में शामिल कर उनके नाम पर कालेज,हास्पिल या जलाशय का नामकरण कर उसे सम्मान दिया जाएं।सीधे साधे सरल व्यक्तित्व की धनी रेशमलाल जांगड़े को सन् 2010में गुरू घासीदास दलित चेतना राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा गया प्रथम सांसद सदस्य के वरिष्ठतम सदस्य रूप में 13 मई 2013को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी एवं राष्ट्रपति प्रतिभा देवी पाटिल ने संसद में सम्मानित किया। 11अगस्त 2014 को प्रथम सांसद रेशमलाल जांगड़े जी का देहावसान हो गया।ऐसे स्वतंत्रता सेनानी, छत्तीसगढ़ के महान विभूति सतनामी समाज के गौरव वीर सपूत स्व रेशमलाल जांगड़े जी को 15 फरवरी जन्मदिवस जयंती पर कृतज्ञ छत्तीसगढ़ राज्य व समाज की ओर से कोटि कोटि नमन वंदन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

मोहन बंजारे प्रदेश महासचिव प्रगतिशील छग सतनामी

9575899100






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