डॉ. प्रभा शुक्ला गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड से अलंकृत

(देवेश साहू)

रायपुर। साहित्य विधा के स्थापना दिवस के अवसर पर वृंदावन हॉल, रायपुर में पुस्तक विमोचन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस गरिमामय कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. अभिलाषा बेहार (सचिव, राजभाषा आयोग छत्तीसगढ़) उपस्थित रहीं, जबकि अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार गिरीश पंकज ने की। विशिष्ट अतिथियों में वरिष्ठ साहित्यकार चितरंजन कर, भाषाविद् एवं वरिष्ठ साहित्यकार महेंद्र ठाकुर, वरिष्ठ कवित्री श्रीमती शशि सुरेंद्र दुबे तथा श्रीमती सोनम राजेश शर्मा (छत्तीसगढ़ हेड, गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड) शामिल रहीं।

 

कार्यक्रम में संस्थापक डॉ. सरोज दुबे द्वारा महिलाओं को आमंत्रित कर एक लघुकथा साझा संग्रह पुस्तक का निर्माण किया गया। इस पहल में 75 महिला लेखिकाओं ने सहभागिता करते हुए कुल 151 लघुकथाएं प्रस्तुत कीं। इन लघुकथाओं के अनुवाद सहित साझा संग्रह को छत्तीसगढ़ में पहली बार गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड से अलंकृत किया गया। पुस्तक का विमोचन वृंदावन हॉल, रायपुर में सम्माननीय अतिथियों एवं उच्चकोटि के साहित्यकारों के करकमलों से संपन्न हुआ।

इस अवसर पर बलौदाबाजार से सेवा निवृत्त प्राचार्य डॉ. प्रभा शुक्ला को भी इस ऐतिहासिक उपलब्धि में सहभागिता के लिए गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड का प्रमाण पत्र एवं मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया।

डॉ. प्रभा शुक्ला को इस सम्मान की प्राप्ति पर सर्व ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष पं. श्याम शुक्ला सहित सुशील तिवारी, मनोज दुबे, विष्णु धार दीवान, नरेंद्र शुक्ला, ऋचा द्विवेदी, अलका शर्मा, सरस्वती तिवारी, प्रभा तिवारी, बबली दुबे, श्रद्धा दुबे, स्वाती मिश्रा, सुष्मिता शुक्ला, कान्यकुब्ज युवा संगिनी की अध्यक्ष श्रीमती गायत्री शुक्ला, अर्चना त्रिवेदी, दीप्ति मिश्रा, नम्रता शुक्ला, मीनाक्षी तिवारी, लीना बाजपेई, प्रेमलता तिवारी, गौरी शुक्ला, शीला दीक्षित, प्रतिमा तिवारी, पूनम तिवारी, कीर्ति मिश्रा, बीना मिश्रा, संध्या बाजपेई एवं श्रेया त्रिवेदी सहित अनेक गणमान्यजनों ने बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

यह आयोजन न केवल महिला साहित्यकारों की सशक्त सहभागिता का उदाहरण बना, बल्कि छत्तीसगढ़ के साहित्यिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में भी दर्ज हुआ।

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