अरमरी कला सोसायटी में धान खरीदी ठप, टोकन संकट से 2000 क्विंटल धान अटका

(दीपक देवदास)

पूर्व विधायक परिवार, भाजपा नेता सहित किसान धान बेचने से वंचित, समिति के चक्कर लगाकर थक चुके किसान

गुरुर। सेवा सहकारी समिति मर्यादित अरमरी कला में धान खरीदी व्यवस्था गंभीर अव्यवस्था का शिकार हो गई है। टोकन नहीं कटने के कारण क्षेत्र के किसान अपनी उपज बेचने से वंचित हैं। स्थिति यह है कि सोसायटी अंतर्गत लगभग 2000 क्विंटल धान की खरीदी अब तक नहीं हो पाई है, जिससे किसानों में भारी आक्रोश और निराशा व्याप्त है।
धान खरीदी के लिए किसान प्रतिदिन सुबह से शाम तक समिति कार्यालय पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें टोकन नहीं मिल पा रहा है। लगातार चक्कर काटने के बावजूद समाधान न निकलने से किसान मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हो चुके हैं। कई किसानों का कहना है कि खरीदी की अंतिम तिथि नजदीक आने के बावजूद अब तक व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ है, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई है।

पूर्व विधायक परिवार भी धान बिक्री से वंचित

अरमरी कला सोसायटी की अव्यवस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूर्व विधायक मदन साहू और उनकी धर्मपत्नी पूर्व विधायक कुमारी बाई साहू के सुपुत्र, भाजपा नेता एवं जनपद सदस्य नरेश साहू भी अपनी उपज नहीं बेच पाए हैं। नरेश साहू की 270 क्विंटल धान सोसायटी में बिक्री के लिए लंबित है। वे प्रतिदिन समिति का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन टोकन न मिलने के कारण उनकी धान खरीदी नहीं हो पा रही है।

अन्य किसान भी परेशान

ग्राम अरमारी के किसान गणेश चाडक की 170 क्विंटल धान भी अब तक नहीं बिक सकी है। वे भी लगातार समिति कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। इसी तरह कई छोटे और बुजुर्ग किसान हैं, जो बार-बार समिति पहुंचने के बावजूद टोकन न मिलने से थक-हार कर लौट रहे हैं। एक बुजुर्ग किसान ने बताया कि उम्र और स्वास्थ्य के कारण रोज समिति आना मुश्किल हो गया है, लेकिन मजबूरी में आना पड़ रहा है।

किसानों में बढ़ता आक्रोश

धान खरीदी में हो रही देरी से किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। किसानों का कहना है कि यदि समय पर धान की खरीदी नहीं हुई, तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। खेतों में मेहनत से उपजाई गई फसल अगर समय पर नहीं बिकी, तो कर्ज और पारिवारिक खर्चों का संकट और गहरा जाएगा।

अंतिम तिथि को लेकर चिंता

सबसे बड़ी चिंता यह है कि खरीदी की अंतिम तिथि तक धान खरीदी पूरी होगी या नहीं, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग

किसानों ने जिला प्रशासन, खाद्य विभाग और सहकारिता विभाग से मांग की है कि तत्काल टोकन जारी कर धान खरीदी व्यवस्था को सुचारु किया जाए, अतिरिक्त कर्मचारियों की व्यवस्था की जाए और किसानों को राहत दी जाए, ताकि उनकी उपज समय पर खरीदी जा सके।