दान पेटी विवाद पर सियासी घमासान तेज, सीईओ के खिलाफ मोर्चा खोलने की चेतावनी

मदन खाण्डेकर

गिधौरी। धार्मिक आस्था के केंद्र तुरतुरिया माता गढ़ में दान पेटी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रशासन बनाम जनप्रतिनिधि की खुली टकराहट में बदल गया है। पारदर्शिता के सवाल पर भड़का यह मामला अब सीधा-सीधा जनपद पंचायत के सीईओ की कार्यशैली पर सवाल बन गया है। जनपद पंचायत के सदस्यों ने दो टूक कहा है—कार्रवाई करो या आंदोलन झेलो।

निर्देशों की अनदेखी या सुनियोजित निर्णय?

सूत्रों के मुताबिक अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि दान पेटी मंदिर परिसर में ही, सभी की मौजूदगी में खोली जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे। लेकिन आरोप है कि तय प्रक्रिया को दरकिनार कर दान पेटी को कसडोल जनपद कार्यालय ले जाया गया। इस फैसले से ग्रामीणों, मंदिर समिति और श्रद्धालुओं में गहरा असंतोष है। सवाल उठ रहे हैं कि जब मौके पर ही पेटी खोली जा सकती थी तो उसे हटाने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या प्रशासन को स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर भरोसा नहीं था?

नोक-झोंक से उपजा आक्रोश

घटना स्थल पर सरपंच और पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा नियमों का हवाला देकर पेटी मौके पर खोलने की मांग की गई, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बात बढ़ी और तीखी नोक-झोंक में बदल गई। आरोप है कि जनपद पंचायत के कुछ प्रतिनिधियों द्वारा अभद्र व्यवहार किया गया, जिससे श्रद्धालुओं का गुस्सा भड़क उठा। मंदिर समिति का स्पष्ट कहना है कि धार्मिक दान की राशि सार्वजनिक रूप से गिनी जानी चाहिए और उसका पूरा ब्यौरा सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि स्थानीय समिति को विश्वास में लिए बिना निर्णय लेना प्रशासन की मनमानी को दर्शाता है।

सभापति का अल्टीमेटम: “स्थानांतरण नहीं तो उग्र आंदोलन”

कसडोल जनपद पंचायत के सभापति व्यासनारायण श्रीवास ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मामला केवल दान पेटी तक सीमित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि मेले में हुए खर्च का भुगतान अब तक लंबित है और सीईओ की कार्यशैली लगातार विवादों में रही है। जनपद पंचायत के कई सदस्यों ने एक स्वर में मांग की है कि वर्तमान सीईओ को तत्काल कसडोल से हटाया जाए। उनका कहना है कि यदि प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की तो चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह प्रशासन की होगी।

जनप्रतिनिधियों की प्रमुख मांगें

सीईओ के खिलाफ जांच और तत्काल कार्रवाई-

कसडोल जनपद पंचायत से स्थानांतरण, दान राशि की सार्वजनिक गणना और पारदर्शी खुलासा, मेले के लंबित भुगतानों का तत्काल निपटारा,

मामला बना प्रतिष्ठा का प्रश्न

यह विवाद अब सिर्फ दान पेटी का नहीं, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता, जनप्रतिनिधियों के सम्मान और स्थानीय भागीदारी का प्रश्न बन चुका है। क्षेत्र में राजनीतिक हलचल तेज है और यदि समय रहते समाधान नहीं निकला तो मामला बड़े आंदोलन में बदल सकता है। फिलहाल निगाहें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या होगी जांच, या फिर सुलगेगा आंदोलन?






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