जनहित की आवाज़ को ‘रंगदारी’ बताने की साजिश? 

(संजीत सोनवानी)

बकहो ओपीएम में खदान विवाद पर जनप्रतिनिधियों का तीखा पलटवार

5 लाख महीना मांगने का आरोप निराधार, कंपनी पर स्थानीय रोजगार और अधिकार दबाने के गंभीर आरोप

अमलाई। शहडोल जिले के अमलाई OCM. क्षेत्र स्थित कोयला खदान को लेकर चल रहा विवाद अब गंभीर मोड़ ले चुका है। निजी कंपनी द्वारा नगर परिषद बकहो कि अध्यक्ष उपाध्यक्ष पर लगाए गए रंगदारी एवं धमकी के आरोपों के बाद अब जनप्रतिनिधियों ने खुलकर मोर्चा संभाल लिया है।नगर परिषद बकहो के उपाध्यक्ष वैभव विक्रम सिंह ने जारी बयान में कंपनी के आरोपों को पूरी तरह झूठा, भ्रामक और साजिशन बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि यह सब जनहित के मुद्दों को दबाने और उनकी छवि खराब करने की सुनियोजित कोशिश है।

“स्थानीय रोजगार को लेकर बड़ा आरोप”

जनप्रतिनिधियों ने कंपनी पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि खदान शुरू करते समय आश्वासन दिया गया था कि पहले स्थानीय युवाओं को रोजगार दिया जाएगा।

लेकिन वर्तमान स्थिति इसके विपरीत है। आरोप है कि कोतमा, बिजुरी, अनूपपुर और उमरिया जैसे बाहरी क्षेत्रों से लोगों को लाकर कंपनी में रखा जा रहा है, जबकि स्थानीय युवा बेरोजगार घूम रहे हैं। इससे क्षेत्र में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है।

“रंगदारी नहीं, अधिकार की लड़ाई”

जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी किसी प्रकार की पैसों की मांग नहीं की है। “5 लाख रुपये प्रतिमाह” की बात को उन्होंने पूरी तरह मनगढ़ंत और निराधार बताया।

उनका कहना है कि उन्होंने केवल सड़क, पानी, रोजगार, धूल प्रदूषण और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दे उठाए हैं, जिन्हें कंपनी लगातार नजरअंदाज करती रही है।

“पर्यावरण और विस्थापन के गंभीर सवाल”

प्रेस बयान में खदान संचालन को लेकर पर्यावरणीय मानकों पर भी सवाल उठाए गए हैं।

आरोप है कि:

खदान क्षेत्र में प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है

आसपास के गांवों में धूल की समस्या गंभीर होती जा रही है

विस्थापित परिवारों को उचित मुआवजा और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जब इन मुद्दों को उठाया गया, तभी कंपनी ने पलटवार करते हुए झूठे आरोप लगाए।

“मानसिक दबाव के दावे पर भी उठे सवाल”

कंपनी द्वारा मानसिक तनाव और आत्मघाती आशंका जताने के बयान को भी जनप्रतिनिधियों ने “सहानुभूति बटोरने की रणनीति” बताया है। उनका कहना है कि इससे वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है।

“निष्पक्ष जांच की मांग”

जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच से यह स्पष्ट हो जाएगा कि जनहित की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है या वास्तव में कोई अवैध दबाव बनाया गया है।

अमलाई का यह खदान विवाद अब केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह स्थानीय अधिकार बनाम कॉर्पोरेट प्रभाव की बड़ी लड़ाई का रूप ले चुका है।

अब सभी की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं, जो इस पूरे मामले की सच्चाई उजागर करेगी।