बिजली खंभे के संपर्क में आया हिरण, जोरदार करंट की चपेट में आने से तड़पकर मौत, एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय सोनाखान के समीप है खम्भा

(विकास अग्रवाल)


बया। सोनाखान वन परिक्षेत्र से एक बेहद दुखद और चिंताजनक मामला सामने आया है। बीते 20 जुलाई को एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय के ठीक समीप बिजली खंभे के सपोर्ट (खींचन) तार में बारिश के कारण उतरे जोरदार करंट की चपेट में आने से एक बेजुबान हिरण की तड़प-तड़पकर मौत हो गई।
इस संवेदनशील इलाके में हुए हादसे के बाद से न केवल वन्यजीव प्रेमियों में आक्रोश है, बल्कि विद्यालय में पढ़ने वाले सैकड़ों बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक और स्थानीय ग्रामीण भी वन विभाग व विद्युत विभाग के खिलाफ लामबंद हो गए हैं।

“यह था पूरा मामला”

मिली जानकारी के अनुसार 20 जुलाई को क्षेत्र में हुई लगातार बारिश के कारण एकलव्य विद्यालय परिसर के पास स्थित बिजली खंभे को सहारा देने के लिए जमीन में बांधे गए खींचन (स्टे) तार में अचानक विद्युत प्रवाह (Current) चालू हो गया था। जंगल से भटककर भोजन और पानी की तलाश में विद्यालय परिसर के आसपास पहुंचे एक हिरण का शरीर जैसे ही इस लोहे के खींचन तार से स्पर्श हुआ। उसे जोरदार झटका लगा। करंट इतना तेज था कि हिरण को संभलने का मौका तक नहीं मिला और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
*वन विभाग की कार्यप्रणाली और घोर लापरवाही पर उठे सवाल*
घटना की सूचना मिलने पर बीट गार्ड मुकुल बघेल और वन विभाग का अमला मौके पर पहुंचा। वन कर्मियों ने घटनास्थल का मुआयना कर मृत हिरण के शव का पंचनामा तैयार किया और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा। हालांकि, इस हादसे ने वन विभाग के दावों और कार्यशैली की पोल खोलकर रख दी है। स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरणविदों ने वन विभाग पर तीखे हमले बोलते हुए आरोप लगाए हैं।

“संवेदनहीनता और गश्ती का अभाव”

एकलव्य विद्यालय का क्षेत्र जंगलों से सटा हुआ है, जहां अक्सर वन्यजीवों की आवाजाही बनी रहती है। इसके बावजूद वन विभाग द्वारा इस क्षेत्र में नियमित और प्रभावी गश्ती नहीं की जा रही थी। यदि बीट गार्ड और गश्ती दल मुस्तैद होता, तो खंभे और स्टे-वायर की खराबी को पहले ही चिन्हित किया जा सकता था वहीं मानसूनी खतरों की अनदेखी
हर साल मानसून के दौरान बिजली खंभों में अर्थिंग या इंसुलेशन फेल होने से करंट उतरने का खतरा रहता है। वन विभाग का यह प्राथमिक दायित्व था कि बारिश शुरू होते ही संवेदनशील वन क्षेत्रों और स्कूल परिसरों से लगे बिजली ढांचे का निरीक्षण कर विद्युत विभाग को अलर्ट जारी करता, जो नहीं किया गया। इसके अलावा सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित विभाग
ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि वन विभाग का अमला केवल वन्यजीव की मौत के बाद पंचनामा बनाने, पोस्टमार्टम कराने और कागजी खानापूर्ति करने तक सीमित रहता है। बेजुबान जीवों की रक्षा के लिए धरातल पर कोई ठोस या निरोधात्मक (Preventive) कदम नहीं उठाए जाते।

“स्कूली बच्चों की जान पर भी बना बड़ा खतरा”

घटनास्थल एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय के बिल्कुल करीब होने के कारण अभिभावकों में गहरा भय और रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि 20 जुलाई को अगर इस स्टे-वायर की चपेट में बेजुबान हिरण की जगह कोई स्कूली बच्चा या राहगीर आ जाता, तो एक बहुत बड़ी जनहानि हो सकती थी।

कड़े कदम उठाने की उठी मांग घटना के बाद बीट गार्ड मुकुल बघेल व वन विभाग की टीम ने विद्युत विभाग को सूचित कर खंभे की बिजली बंद कराई और वायर की मरम्मत कराने के निर्देश दिए हैं।
लेकिन क्षेत्रवासियों का कहना है कि केवल औपचारिकता से काम नहीं चलेगा। वन्यजीव प्रेमियों ने मांग की है कि: सोनाखान रेंज के सभी बीटों में तुरंत अभियान चलाकर खतरनाक बिजली तारों और खंभों को चिन्हित किया जाए। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई हो। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए विद्यालय व आवासीय इलाकों से लगे जंगलों में पुख्ता सुरक्षा प्रबंध किए जाएं।

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