बलौदाबाजार में 12 लाख की ज्वेलरी लूट का खुलासा, अंतरराज्यीय गिरोह गिरफ्तार

बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में पुलिस ने तकनीक और सूक्ष्म जांच का बेहतरीन उदाहरण पेश करते हुए 12 लाख रुपये की ज्वेलरी लूट का सनसनीखेज खुलासा किया है। लगभग दो सप्ताह तक चली गहन जांच, 1000 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की पड़ताल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित विश्लेषण की मदद से पुलिस ने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के चार शातिर अंतरराज्यीय लुटेरों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के कब्जे से हथियार, वाहन, नकदी और चांदी के आभूषण सहित लगभग 26 लाख रुपये का सामान बरामद किया गया है। पुलिस के अनुसार यह गिरोह कई राज्यों में हत्या, लूट, डकैती और आर्म्स एक्ट जैसे 100 से अधिक गंभीर मामलों में शामिल रहा है।


जानकारी के अनुसार, 16 जुलाई की सुबह करीब 9:30 बजे भाटापारा ग्रामीण थाना क्षेत्र के तरेंगा निवासी दीपक ज्वेलर्स के संचालक बलराम सोनी अपनी स्कूटी से रोहरा की ओर जा रहे थे। उनके बैग में करीब 13 किलोग्राम चांदी और 70 ग्राम सोने के आभूषण थे। जैसे ही वे रोहरा हाई स्कूल के पास पहुंचे, दो मोटरसाइकिलों पर सवार चार नकाबपोश बदमाशों ने उन्हें घेर लिया। बदमाशों ने हथियार दिखाकर उनके साथ मारपीट की, मोबाइल फोन और स्कूटी की चाबी छीन ली तथा बैग में रखे कीमती जेवर लेकर मौके से फरार हो गए। दिनदहाड़े हुई इस वारदात से इलाके में सनसनी फैल गई थी। घटना की गंभीरता को देखते हुए जिले के नवपदस्थ पुलिस अधीक्षक गौरव राय ने इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए तत्काल विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया।

पुलिस टीम ने घटनास्थल और आरोपियों के संभावित भागने के रास्तों पर लगे 1000 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। इसके साथ ही साइबर सेल की मदद से तकनीकी साक्ष्य जुटाए गए और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित वीडियो एवं डेटा एनालिटिक्स का उपयोग कर संदिग्धों की गतिविधियों का विश्लेषण किया गया। पुलिस ने कई जिलों और राज्यों के बीच आरोपियों के मूवमेंट की कड़ियां जोड़ते हुए उनके ठिकानों तक पहुंच बनाई। तकनीकी इनपुट, साइबर विश्लेषण और मुखबिर तंत्र से मिली सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में दबिश देकर चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बबलू पाण्डेय उर्फ शत्रुघ्न (चित्रकूट), गंगासागर पाण्डेय (उत्तर प्रदेश), जयदीप गुप्ता (रीवा, मध्य प्रदेश) और जिया उल हक (गोंडा, उत्तर प्रदेश) के रूप में हुई है। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी है। पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला कि यह गिरोह केवल बलौदाबाजार की लूट तक सीमित नहीं था।

जांच में सामने आया कि आरोपियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विभिन्न थानों में हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, डकैती, चोरी और आर्म्स एक्ट के 100 से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार यह गिरोह अब तक करीब 10 करोड़ रुपये से अधिक की लूट और डकैती की वारदातों को अंजाम दे चुका है। इतना ही नहीं, वर्ष 2022 और 2024 में भाटापारा क्षेत्र में ज्वेलरी कारोबारियों के साथ हुई दो बड़ी लूट की घटनाओं में भी इसी गिरोह की संलिप्तता सामने आई है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक पिस्तौल, एक देशी कट्टा, 14 जिंदा कारतूस, एक लोहे की तलवार, महिंद्रा स्कॉर्पियो, दो मोटरसाइकिल, पांच मोबाइल फोन, नकदी तथा चांदी के जेवर बरामद किए हैं। जब्त सामग्री की कुल कीमत लगभग 26 लाख रुपये बताई जा रही है।

पुलिस का मानना है कि बरामद हथियारों और वाहनों का उपयोग कई अन्य वारदातों में भी किया गया होगा, जिसकी जांच की जा रही है। पुलिस अब आरोपियों को रिमांड पर लेकर उनके पूरे अंतरराज्यीय नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में लगी हैं कि गिरोह के अन्य सदस्य कौन हैं, किन राज्यों में उनकी सक्रियता रही है और किन-किन मामलों में उनकी संलिप्तता रही है। साथ ही प्रदेश के बाहर हुई लूट और डकैती की घटनाओं से भी इस गिरोह के संबंधों की जांच की जा रही है।

बलौदाबाजार-भाटापारा पुलिस की इस कार्रवाई को हाल के वर्षों की सबसे बड़ी और तकनीकी रूप से सबसे सफल जांचों में शामिल माना जा रहा है। आधुनिक तकनीक, एआई आधारित विश्लेषण, साइबर सेल की सक्रियता और पारंपरिक मुखबिर तंत्र के समन्वय से पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने कई राज्यों में लंबे समय से आतंक मचा रखा था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस सफलता से भविष्य में ऐसे संगठित अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने में भी मदद मिलेगी।