मध्य प्रदेश को जैव विविधता संरक्षण के लिए मोदी सरकार की अतिरिक्त मदद, दिए 32.73 लाख रुपये
भोपाल। मध्य प्रदेश में जैव विविधता संरक्षण, स्थानीय जैव संसाधनों के दस्तावेजीकरण और उनसे जुड़े समुदायों की आजीविका को मजबूती देने की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने पहुंच एवं लाभ-साझाकरण तंत्र के तहत मध्य प्रदेश को 32.73 लाख रुपये आवंटित किए हैं।
उल्लेखनीय है कि देशभर में जारी 2.80 करोड़ रुपये की राशि में मध्य प्रदेश को मिलने वाला यह हिस्सा उसे प्रमुख प्राप्तकर्ता राज्यों में शामिल करता है। यह राशि राज्य में जैव विविधता संरक्षण और उससे जुड़े स्थानीय समुदायों के हित में विभिन्न गतिविधियों पर खर्च की जाएगी।
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने भारत के जैविक संसाधनों के उपयोग से उत्पन्न होने वाले लाभों को साझा करने के उद्देश्य से पहुंच एवं लाभ-साझाकरण यानी एबीएस तंत्र के तहत कुल 2.82 करोड़ रुपये वितरित किए हैं। इसमें से 2.80 करोड़ रुपये 27 राज्य जैव विविधता बोर्डों तथा तीन केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों को जारी किए गए हैं। इसके अतिरिक्त 2.01 लाख रुपये भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, कर्नाटक को दिए जा रहे हैं।
मध्य प्रदेश को आवंटित 32.73 लाख रुपये इस पूरी राशि में तीसरा सबसे बड़ा राज्यवार हिस्सा है। गुजरात को 44.59 लाख रुपये और पश्चिम बंगाल को 41.24 लाख रुपये मिले हैं। मध्य प्रदेश के बाद ओडिशा को 32.57 लाख रुपये, बिहार को 30.86 लाख रुपये और छत्तीसगढ़ को 16.54 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं। इससे स्पष्ट है कि जैविक संसाधनों और बागवानी फसलों की विविधता के लिहाज से मध्य प्रदेश का महत्व राष्ट्रीय स्तर पर भी रेखांकित हुआ है।
इस संबंध में राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) की ओर से अधिकारिक तौर पर कहा गया है कि यह राज्य की जैव विविधता को संरक्षित करने और स्थानीय स्तर पर उसके सतत उपयोग की दिशा में संसाधन उपलब्ध कराने की पहल है।
फूलगोभी, मिर्च, भिंडी और टमाटर से जुड़े संसाधनों से आया लाभ
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण को मेसर्स एडवांटा एंटरप्राइजेज लिमिटेड, पूर्व में मेसर्स यूपीएल लिमिटेड, से एबीएस के तहत 2.94 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। यह राशि फूलगोभी की आठ संकर किस्मों, मिर्च की पांच संकर किस्मों, भिंडी की पांच संकर किस्मों और टमाटर की छह संकर किस्मों से जुड़े आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से संबंधित है।
इस मामले में जैविक संसाधनों तक पहुंच किसी अन्य कंपनी के अधिग्रहण के माध्यम से हुई थी। ऐसे में किसानों, समुदायों अथवा किसी एक पहचान योग्य भौगोलिक स्रोत को प्रत्यक्ष लाभार्थी के रूप में चिन्हित करना संभव नहीं था। इसी कारण राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने ऐसे मामलों में लाभ-साझाकरण राशि के वितरण और उपयोग के लिए विशेषज्ञ समिति की सिफारिश के आधार पर एक कार्यप्रणाली विकसित की। प्राधिकरण द्वारा इसे अनुमोदित किए जाने के बाद संबंधित राज्यों में बागवानी फसलों की खेती को ध्यान में रखते हुए राशि का वितरण किया गया।
मध्य प्रदेश में किन कामों पर खर्च होगी राशि
राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेशों को जारी राशि का उपयोग जन जैव विविधता रजिस्टरों के दस्तावेजीकरण एवं अद्यतन, जैव विविधता के इन-सीटू और एक्स-सीटू संरक्षण, खराब हो चुके पारिस्थितिक तंत्रों के पुनर्स्थापन तथा जैव विविधता विरासत स्थलों को मजबूत करने जैसे कार्यों में किया जाना है।
इसके साथ ही जैव विविधता प्रबंधन समितियों की क्षमता बढ़ाने और स्थानीय समुदायों की आजीविका के संवर्धन पर भी राशि खर्च की जाएगी। मध्य प्रदेश जैसे बड़े और जैव विविधता की दृष्टि से समृद्ध राज्य के लिए यह राशि स्थानीय स्तर पर जैव संसाधनों के संरक्षण और उनके वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
प्राप्त राशि का उपयोग करने के बाद संबंधित संस्थाओं को एक वर्ष के भीतर उपयोग प्रमाण पत्र और व्यय विवरण प्रस्तुत करना होगा। इससे यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है कि जैविक संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग से प्राप्त आर्थिक लाभ संरक्षण कार्यों तक पहुंचे और उसका उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के लिए ही हो।
अनुसंधान संस्थानों को भी लाभ
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण को सुमितोमो केमिकल इंडिया लिमिटेड, मुंबई, पूर्व में एक्सेल क्रॉप केयर, से दो सूक्ष्मजीव उपभेदों के अनुसंधान और व्यावसायिक उपयोग के लिए 7.15 लाख रुपये एबीएस राशि के रूप में प्राप्त हुए। इनमें स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस और ट्राइकोडर्मा हारजियानम के संबंधित उपभेद शामिल हैं, जिन्हें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, कर्नाटक से प्राप्त किया गया था।
चूंकि ये जैविक संसाधन एक सार्वजनिक अनुसंधान संस्थान से प्राप्त हुए थे, इसलिए नियमों के अनुसार एबीएस राशि का 30 प्रतिशत यानी 2.01 लाख रुपये भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान को दिया जा रहा है। इस राशि का उपयोग जैविक संसाधनों के भंडारों के रखरखाव, अनुसंधान, जैव विविधता सर्वेक्षण, वर्गीकरण एवं संरक्षण संबंधी क्षमता विकास तथा जैव संसाधनों और उनसे जुड़े वन्य जीवों के इन-सीटू और एक्स-सीटू संरक्षण के लिए किया जाएगा।
संरक्षण और स्थानीय विकास के बीच बनेगा संतुलन
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के अनुसार अब तक कुल 185 करोड़ रुपये की एबीएस राशि जारी की जा चुकी है। इसका उद्देश्य भारत के जैविक संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग से उत्पन्न आर्थिक लाभ को जैव विविधता संरक्षण, उसके सतत उपयोग तथा किसानों, स्थानीय समुदायों और संरक्षण से जुड़े अन्य लोगों के सामाजिक-आर्थिक विकास से जोड़ना है।मध्य प्रदेश को मिला 32.73 लाख रुपये का आवंटन इसी व्यापक व्यवस्था का हिस्सा है।








