दुर्ग के बाद अब बलरामपुर में अफीम की खेती का खुलासा…बड़ा सवाल: किसके संरक्षण में हो रही थी खेती..?

(देवेश साहू)

बलरामपुर। जिले के कुसमी विकासखंड के त्रिपुरी गांव में अवैध अफीम की खेती का बड़ा मामला सामने आया है। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंचकर जांच और कार्रवाई में जुट गई है।
जानकारी के मुताबिक त्रिपुरी गांव में करीब 2 से 2.5 एकड़ जमीन पर अफीम की खेती की जा रही थी। यह खेती रूपदेव और कौनशील नाम के किसानों के खेत में की जा रही थी। मामले का खुलासा होते ही क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।

बताया जा रहा है कि अफीम की खेती के लिए झारखंड से मजदूर बुलाकर काम कराया जा रहा था। खेत की सुरक्षा और निगरानी के लिए चारों तरफ झटका तार (करंट वाला तार) लगाया गया था, ताकि कोई बाहरी व्यक्ति खेत के पास न पहुंच सके।

सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर खेत का निरीक्षण किया और अफीम की फसल को जब्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।

फिलहाल मजदूरों और खेत मालिक को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि इतने बड़े पैमाने पर हो रही इस अवैध खेती के पीछे किसका संरक्षण और नेटवर्क काम कर रहा था।

डिजिटल निगरानी के बावजूद अवैध खेती कैसे? जियो-टैगिंग सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

छत्तीसगढ़ में कृषि विभाग द्वारा फसलों की सटीक निगरानी और सरकारी योजनाओं का पारदर्शी लाभ सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे (ई-गिरदावरी) के तहत जियो-टैगिंग (Geo-tagging) अनिवार्य कर दी गई है। मोबाइल एप (PV App) के माध्यम से पटवारी और संबंधित अधिकारी खेतों में जाकर फसलों की जियो-ट्रैकिंग करते हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य फसल बीमा, क्षतिपूर्ति और धान खरीदी में होने वाली संभावित गड़बड़ियों को रोकना तथा किसानों तक योजनाओं का सही लाभ पहुंचाना है।
ऐसी स्थिति में यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि जब खेतों और फसलों की डिजिटल निगरानी की पूरी व्यवस्था लागू है, तब दुर्ग के बाद अब बलरामपुर में भी इतने बड़े पैमाने पर अफीम की खेती का खुलासा होना कैसे संभव हुआ। करीब 2 से 2.5 एकड़ में अवैध फसल उगाई जाना किसी एक व्यक्ति का काम भर नहीं माना जा रहा है।

इतनी बड़ी खेती लंबे समय तक बिना किसी की जानकारी के चलना कठिन है। ऐसे में यह भी चर्चा का विषय बन गया है कि क्या निगरानी तंत्र में कहीं गंभीर लापरवाही हुई है या फिर नीचे से ऊपर तक किसी स्तर पर मिलीभगत की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।अब देखना यह होगा कि जांच के दौरान इस पूरे मामले में किस स्तर तक जिम्मेदारी तय होती है और अवैध खेती के पीछे काम कर रहे नेटवर्क का खुलासा कैसे होता है।






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