मुड़पार (चु.) में धूमधाम से मनी भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती, सामाजिक समरसता और शिक्षा का दिया संदेश

(पंकज कुर्रे)

जांजगीर-चांपा। जिले के पामगढ़ ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत मुड़पार (चु.) में बुद्ध विचार संगठन एवं समस्त ग्रामवासियों के संयुक्त तत्वावधान में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 136वीं जयंती अत्यंत हर्षोल्लास, श्रद्धा और गरिमामय वातावरण में भव्य रूप से मनाई गई। इस अवसर पर पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। कार्यक्रम स्थल को आकर्षक सजावट, ध्वज, बैनर और रंग-बिरंगी रोशनी से सुसज्जित किया गया था, जिससे आयोजन की भव्यता और बढ़ गई।

यह आयोजन केवल एक जयंती समारोह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक चेतना, समानता, शिक्षा और संवैधानिक मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बना। कार्यक्रम की शुरुआत बाबा साहब के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके पश्चात संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन किया गया और उपस्थित लोगों ने सामाजिक समरसता, भाईचारे और समानता का संकल्प लिया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. दीनानाथ यादव, डॉ. श्रीमती अर्चना बौद्ध एवं कुणाल रामटेके उपस्थित रहे, वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में अस्वनी कुमार कुर्रे और मनोज यादव ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। सभी अतिथियों का ग्रामवासियों द्वारा पुष्पगुच्छ, माल्यार्पण एवं सम्मान के साथ आत्मीय स्वागत किया गया।

अपने उद्बोधन में वक्ताओं ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन संघर्ष, त्याग, विद्वता और सामाजिक परिवर्तन की अनुपम मिसाल है। उन्होंने अपने ज्ञान, साहस और दृढ़ संकल्प के बल पर समाज के वंचित, शोषित और पीड़ित वर्गों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार दिलाया। उन्होंने शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे बड़ा हथियार बताया और युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा को अपनाकर समाज में जागरूकता फैलाएं तथा अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी ईमानदारी से पालन करें।

वक्ताओं ने यह भी कहा कि संविधान केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक के सम्मान, अधिकार और न्याय की गारंटी है। बाबा साहब का संदेश “शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो” आज भी उतना ही प्रासंगिक है और समाज को आगे बढ़ाने के लिए भेदभाव मिटाकर समान अवसर और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना आवश्यक है।

कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, प्रेरक गीत, भाषण एवं बच्चों द्वारा बाबा साहब के जीवन पर आधारित आकर्षक प्रस्तुतियां दी गईं, जिन्हें उपस्थित जनसमूह ने खूब सराहा। महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों एवं बच्चों की बड़ी संख्या में सहभागिता ने पूरे आयोजन को जीवंत, प्रेरणादायक और यादगार बना दिया।

अंत में आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों, ग्रामवासियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। यह आयोजन ग्राम मुड़पार (चु.) के लिए ऐतिहासिक और प्रेरणादायक अवसर बन गया, जिसने समाज में एकता, जागरूकता और शिक्षा के महत्व का सशक्त संदेश दिया।

आयोजन में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे —

रहश कुर्रे, कमलेश लहरे, रामचरण कुर्रे, खेमलाल रत्नाकर, प्रमोद कुर्रे, हीरालाल रत्नाकर, लोचन जांगड़े, भागवत अनंत, रवि रत्नाकर, कृष्ण दिनकर, अजय भारद्वाज, जगदीश लहरे, कंद्रभान कुर्रे, किशोर लहरे सहित समस्त ग्रामवासी।