बिलारी विद्यालय में खगोल विज्ञान कार्यशाला एवं स्टार-गेजिंग’ कार्यक्रम का हुआ आयोजन, बच्चों ने ब्रह्मांड की अनंत गहराइयों को करीब से किया महसूस

(रौनक साहू)

कसडोल। शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला बिलारी (क) में आयोजित एक दिवसीय ‘खगोल विज्ञान कार्यशाला एवं स्टार-गेजिंग’ कार्यक्रम में बच्चों ने ब्रह्मांड की अनंत गहराइयों को करीब से महसूस किया। इस ज्ञानवर्धक कार्यक्रम का सफल संयोजन विद्यालय के शिक्षक राजेश पटेल द्वारा किया गया। जिनके प्रयासों से ग्रामीण अंचल के बच्चों को पहली बार टेलिस्कोप के माध्यम से चंद्रमा के क्रेटर तथा बृहस्पति और उसके परिवार (उनके चंद्रमाओं) का अवलोकन करने का अवसर प्राप्त हुआ।

“भ्रांतियों को दूर कर बताया वैज्ञानिक तथ्य”

मुख्य प्रशिक्षक और खगोल विज्ञान के जानकार अजय कुमार भोई (व्याख्याता, पीएम श्री सेजेस बसना) ने बच्चों की कई वैज्ञानिक भ्रांतियों को दूर किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आसमान का सबसे चमकीला तारा ध्रुव तारा (Pole Star) नहीं, बल्कि ‘सायरस’ (Sirius) है, जिसे व्याध तारा भी कहा जाता है। उन्होंने वैज्ञानिक तथ्यों के साथ बताया कि चमकीलेपन के मामले में सायरस का स्थान सर्वोपरि है। भोई ने बच्चों को आकाश में तारों और ग्रहों के बीच अंतर पहचानना सिखाया। उन्होंने बताया कि जो टिमटिमाते हैं वे तारे हैं, जबकि जो स्थिर चमक के साथ दिखाई देते हैं वे हमारे सौरमंडल के ग्रह हैं।

“तारों के रंग और तापमान का विज्ञान”

अजय कुमार भोई ने बच्चों को तारों के रंगों से जुड़ी बेहद रोचक वैज्ञानिक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार आग की लपटों का रंग उनके तापमान पर निर्भर करता है, वैसे ही तारों का रंग भी उनके तापमान का सूचक है। नीले और सफेद रंग के तारे सबसे गर्म होते हैं, जबकि लाल रंग के तारे तुलनात्मक रूप से ठंडे होते हैं। बच्चों ने पहली बार जाना कि आसमान में दिख रहे अलग-अलग रंगों के तारों का अपना एक विशिष्ट भौतिक विज्ञान है।

“कहानियों से नक्षत्रों का परिचय”

श्री भोई ने भारतीय पौराणिक कहानियों और प्राचीन मान्यताओं के माध्यम से बच्चों को विभिन्न नक्षत्रों (Constellations) की जानकारी दी। उन्होंने इन नक्षत्रों के आधुनिक वैज्ञानिक नाम बताते हुए उनके पीछे छिपे खगोलीय रहस्यों और तारों की संरचना के बारे में विस्तार से समझाया। बच्चों ने बड़े उत्साह के साथ आकाश में रोहिणी(Aldebaran), मृग(Orion), पुनर्वसु (Castor and Pollux) ,ब्रम्हहृदय( Capella) तथा अन्य नक्षत्रों की पहचान करना सीखा।

“डिजिटल माध्यम और टेलिस्कोप का संगम”

कार्यक्रम के प्रथम चरण में प्रोजेक्टर के माध्यम से अंतरिक्ष संबंधी विशेष डॉक्यूमेंट्री फिल्म दिखाई गई, जिससे बच्चों ने ब्लैक होल, गैलेक्सी और सौरमंडल की कार्यप्रणाली को विजुअल माध्यम से समझा। द्वितीय चरण में शाम होते ही अत्याधुनिक टेलिस्कोप के माध्यम से आकाश दर्शन कराया गया, जिसमें बृहस्पति ग्रह और चंद्रमा की सतह को देखकर छात्र रोमांचित हो उठे। संयोजक राजेश पटेल ने बताया कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बच्चों के भीतर छिपे वैज्ञानिक को जगाना है।

प्रधान पाठक टी. पी. नवरंगे ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से स्कूली शिक्षा को एक नया आयाम मिलता है एवं स्कूली बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तार्किक सोच का विकास होता है। इस अवसर पर समस्त विद्यालय परिवार एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।






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