बार-बार मांग के बाद भी नहीं बना पुल, अब ग्रामीण स्वयं कर रहे श्रमदान से निर्माण
मदन खाण्डेकर
बलौदाबाजार। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के कसडोल विकासखंड अंतर्गत महानदी तट पर बसे वनग्राम दौनाझर एवं घिरघोल के ग्रामीण वर्षों से पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं। जिला मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित इन गांवों तक पहुंचने के लिए एक बड़े नाले को पार करना पड़ता है, जो बरसात के दिनों में उफान पर आ जाता है और आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है।
ग्रामीणों के अनुसार, वर्षा ऋतु में किसी व्यक्ति की तबीयत खराब होने पर उसे चार लोगों के सहारे उठाकर नाला पार कराना पड़ता है। वहीं स्कूली बच्चों को पढ़ाई के लिए जान जोखिम में डालकर ग्राम पुटपुरा तक पहुंचना पड़ता है। यह नाला ग्राम पिपरछेड़ी की ओर से बहते हुए महानदी में अमेठी एनीकेट के लगभग 200 मीटर नीचे जाकर मिलता है।
ग्रामीणों ने बताया कि पुल निर्माण की मांग को लेकर कई बार जनदर्शन, सुशासन तिहार तथा अन्य माध्यमों से शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया गया, लेकिन आज तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। लगातार उपेक्षा से निराश ग्रामीणों ने अब स्वयं आगे बढ़कर श्रमदान और आपसी सहयोग से स्थायी पुल निर्माण का निर्णय लिया है।
ग्राम दौनाझर के ग्रामीणों का कहना है कि पुल नहीं होने की सबसे बड़ी समस्या उन्हें ही झेलनी पड़ती है, इसलिए अब वे अपने संसाधनों और श्रम से पुल निर्माण का कार्य कर रहे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि यह पहल शासन-प्रशासन के लिए भी एक सीख होगी कि बुनियादी सुविधाओं के अभाव में लोग किस प्रकार स्वयं समाधान खोजने को मजबूर हो जाते हैं।
ग्रामीणों द्वारा श्रमदान से बनाए जा रहे इस पुल के पूर्ण होने पर दौनाझर, घिरघोल सहित आसपास के ग्रामीणों को आवागमन में बड़ी सुविधा मिलेगी तथा बरसात के दिनों में होने वाली परेशानियों से राहत मिलेगी।
इस जनसहभागिता आधारित कार्य में पीतांबर पैकरा, सुरेश दीवान, केदार ध्रुव, फत्ते निषाद, ईश्वरी प्रसाद वर्मा सहित ग्राम दौनाझर के समस्त ग्रामवासियों का विशेष योगदान और सहयोग उल्लेखनीय है।


