समतलीकरण के नाम पर स्कूल परिसर में राखड़ डंपिंग, बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

मुलमुला, 08.09.26 । पामगढ़ विकासखंड के ग्राम पंचायत मुलमुला में शासकीय हाई स्कूल, प्राथमिक शाला और मिडिल स्कूल परिसर में समतलीकरण के नाम पर डस्ट यानी राखड़ (फ्लाई ऐश) डंप किए जाने का मामला सामने आया है। स्कूल परिसर में राखड़ का ढेर लगाने के साथ ही बड़ी-बड़ी गाड़ियों और जेसीबी से काम कराया जा रहा है, जबकि इसी दौरान स्कूल का संचालन भी जारी है। ऐसे में बच्चों के स्वास्थ्य के साथ-साथ उनकी सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।


बताया जा रहा है कि स्कूल परिसर को समतल करने के नाम पर राखड़ डाली जा रही है। फ्लाई ऐश के महीन कण हवा में फैलने की स्थिति में आसपास के लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब स्कूल में बच्चे मौजूद हैं और नियमित कक्षाएं संचालित हो रही हैं, तब भारी वाहनों और जेसीबी के संचालन के दौरान बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था की गई है?

प्राचार्य ने जिम्मेदारी से किया इनकार


मामले को लेकर जब स्कूल की प्राचार्य सावित्री सिंह यादव से सवाल किया गया कि स्कूल परिसर में बड़ी-बड़ी गाड़ियां और जेसीबी चल रही हैं और इसी दौरान बच्चे भी स्कूल में मौजूद हैं। यदि कोई बच्चा खेलते समय राखड़ के बीच फंस जाए अथवा किसी भारी वाहन की चपेट में आकर दुर्घटना हो जाए तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?

इस पर प्राचार्य ने कथित तौर पर इसे स्कूल की जिम्मेदारी मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह पंचायत का काम है।

प्राचार्य के इस जवाब के बाद सवाल और गंभीर हो जाता है कि आखिर स्कूल परिसर में बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? यदि निर्माण या समतलीकरण का काम पंचायत द्वारा कराया जा रहा है, तो स्कूल संचालन के दौरान बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की गई?

सरपंच बोले—स्कूल की मांग पर कराया जा रहा काम

वहीं मामले में ग्राम पंचायत मुलमुला के सरपंच अमितेंद्र सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि स्कूल की मांग के आधार पर यह कार्य कराया जा रहा है। हालांकि, दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी को लेकर भी स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया।

मीडिया कर्मियों द्वारा पंचायत से संबंधित एनओसी और पर्यावरण विभाग की अनुमति के संबंध में जानकारी मांगी गई, लेकिन मौके पर इन दस्तावेजों को प्रस्तुत नहीं किया जा सका। ऐसे में अब यह सवाल उठ रहा है कि स्कूल परिसर में फ्लाई ऐश लाकर डालने से पहले आवश्यक अनुमति और पर्यावरणीय प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं?

बीईओ ने माना—फ्लाई ऐश से समतलीकरण गलत

मामले की जानकारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी रामेंद्र जोशी को दिए जाने पर उन्होंने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी उसी दिन मिली है। उन्होंने स्कूल से पूरे मामले की जानकारी लेते हुए प्रतिवेदन मंगाने की बात कही।

बीईओ ने स्पष्ट रूप से माना कि फ्लाई ऐश बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकती है और स्कूल परिसर में राखड़ से समतलीकरण करना गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों की सुरक्षा महत्वपूर्ण है।

बीईओ के इस बयान के बाद अब पूरे मामले की जांच की आवश्यकता और बढ़ गई है। यह पता लगाया जाना जरूरी है कि स्कूल परिसर में राखड़ डालने का निर्णय किसके निर्देश पर लिया गया, इसके लिए किस स्तर से अनुमति ली गई और काम के दौरान स्कूल में मौजूद बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए।

चिकित्सक ने जताया स्वास्थ्य पर गंभीर असर का खतरा

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पामगढ़ के चिकित्सक एवं पूर्व खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. सौरभ यादव ने राखड़ के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जताई। उनके अनुसार राखड़ के महीन कण सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं। इससे अस्थमा और अन्य श्वसन संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

उन्होंने बताया कि राखड़ का असर केवल इंसानों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पेड़-पौधों और फसलों पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यदि राखड़ जल स्रोतों तक पहुंचती है तो इसका असर पानी में रहने वाले जीवों पर भी पड़ सकता है।

डॉ. यादव के अनुसार दूषित पानी के सेवन से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं और लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहना गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकता है।

अधिकारियों को जानकारी नहीं, तो अनुमति किसने दी?

इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि स्कूल परिसर में राखड़ डंपिंग की जा रही है, तो इसकी अनुमति किसने दी?

स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार एसडीएम, तहसीलदार और जनपद पंचायत के सीईओ को भी मामले की जानकारी होने की बात सामने नहीं आई है। ऐसे में अब प्रशासनिक स्तर पर यह जांच जरूरी है कि राखड़ को स्कूल परिसर में लाने और डालने से पहले संबंधित विभागों से अनुमति ली गई थी या नहीं।

बच्चों की सुरक्षा और पर्यावरणीय नियमों की जांच जरूरी

स्कूल परिसर कोई सामान्य डंपिंग या निर्माण स्थल नहीं है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में बच्चे आते हैं। ऐसे में स्कूल संचालन के दौरान भारी वाहनों और जेसीबी का चलना, साथ ही राखड़ का खुले में डंप होना, बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों के लिहाज से गंभीर विषय है।

अब सवाल यह है कि क्या स्कूल परिसर में फ्लाई ऐश डालने के लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी? क्या पर्यावरणीय मानकों का पालन किया गया? स्कूल संचालन के दौरान बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए? और किसी दुर्घटना की स्थिति में आखिर जिम्मेदारी किसकी होगी?

मामले में प्रशासन द्वारा स्थल निरीक्षण कर दस्तावेजों की जांच और जिम्मेदारी तय करना जरूरी हो गया है। यदि बिना आवश्यक अनुमति के राखड़ डंपिंग की गई है, तो संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी सवालों के घेरे में है।

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