दो थाना क्षेत्रों के लिए चुनौती बना जुआ फड़, रोजाना लाखों के दांव लगने की चर्चा
(संजीत सोनवानी)
बिजुरी। अनूपपुर जिले के बिजुरी और कोतमा थाना क्षेत्रों की सीमा पर कथित तौर पर बड़े पैमाने पर जुआ फड़ संचालित होने की चर्चा है। स्थानीय स्तर पर प्रतिदिन 15 से 20 लाख रुपये तक के दांव लगाए जाने के दावे किए जा रहे हैं। यदि इन दावों की पुष्टि होती है, तो यह न केवल कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है, बल्कि दोनों थाना क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों की निगरानी और रोकथाम को लेकर भी कई सवाल खड़े करता है।
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यदि सीमा क्षेत्र में लंबे समय से इतनी बड़ी रकम के दांव लगाए जा रहे हैं, तो संबंधित पुलिस थानों को इसकी भनक क्यों नहीं लग रही है? क्या इस गतिविधि पर प्रभावी निगरानी रखी जा रही है, अथवा कार्रवाई के अभाव में जुआ संचालकों के हौसले बुलंद हैं? इन सवालों का जवाब संबंधित पुलिस अधिकारियों की जांच और आधिकारिक प्रतिक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
“जानकारी मांगने पर सवालों के घेरे में पुलिस की कार्यप्रणाली”
मामले से संबंधित जानकारी जुटाने के दौरान पुलिस प्रशासन के कुछ जिम्मेदार कर्मचारियों की कार्यशैली भी चर्चा का विषय बन रही है। आरोप है कि जब इस कथित जुआ फड़ के संबंध में जानकारी लेने या उपलब्ध सूचनाओं पर चर्चा करने का प्रयास किया जाता है, तो संबंधित मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देने के बजाय सवाल पूछने वाले पत्रकारों से ही उलटे सवाल-जवाब किए जाने लगते हैं, जो पुलिस विभाग जैसे महकमे के लिए बिल्कुल भी अशोभनीय है।
बिजुरी थाना क्षेत्र के एक पुलिसकर्मी से गत दिवस बातचीत के दौरान भी कथित तौर पर ऐसा ही अनुभव सामने आया। संबंधित पुलिसकर्मी द्वारा सीधे और स्पष्ट जवाब देने के बजाय इधर-उधर की बातें करते हुए पत्रकार से ही सवाल किए जाने लगे। इस रवैये ने पुलिस की कार्यप्रणाली और मामले में पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
हालांकि, केवल सवाल-जवाब या संवाद के आधार पर किसी पुलिसकर्मी की संलिप्तता अथवा जुआ संचालकों को संरक्षण दिए जाने का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। लेकिन यदि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध जुआ संचालित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह तथ्यों की जांच करे और स्थिति स्पष्ट करे।
पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में निगरानी और कार्रवाई की जरूरत–
जिले में अवैध गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने की जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की है। ऐसे में बिजुरी और कोतमा थाना क्षेत्रों की सीमा पर कथित रूप से संचालित जुआ फड़ का मामला वरिष्ठ अधिकारियों के लिए गंभीरता से जांच करने का विषय है।
स्थानीय स्तर पर वाल उठ रहे हैं कि क्या थाना क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों की रोकथाम के लिए नियमित निगरानी और प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में जिले की कानून-व्यवस्था की समीक्षा के दौरान इस तरह की शिकायतों को प्राथमिकता से लिया जाना चाहिए, ताकि अवैध कारोबार के विरुद्ध कार्रवाई को लेकर आमजन का विश्वास मजबूत हो सके।
*निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगी वास्तविकता-*
बिजुरी और कोतमा थाना क्षेत्रों की सीमा पर कथित जुआ फड़ के संचालन, प्रतिदिन लाखों रुपये के दांव लगाए जाने के दावों तथा पुलिस की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। यदि जुआ संचालन की पुष्टि होती है, तो इसमें संलिप्त लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अवैध गतिविधियों को संरक्षण देने के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित जिम्मेदारों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
अब देखना यह है कि अनूपपुर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और बिजुरी–कोतमा सीमा पर कथित रूप से संचालित जुआ फड़ की वास्तविकता सामने लाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।
सवाल उठना लाजिमी है
क्या पुलिस प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कर जुआ फड़ के संचालन पर रोक लगाएगा, या सीमा क्षेत्र में चल रही इन गतिविधियों को लेकर उठते सवाल अनुत्तरित ही रहेंगे?





