चिल्फी घाटी, रानीदहरा जलप्रपात एवं भोरमदेव मंदिर का भौगोलिक भ्रमण

(अमृत साहू)

भाटापारा। प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी शासकीय गजानंद अग्रवाल स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भाटापारा के भूगोल विभाग के 34 छात्र-छात्राओं ने सहायक प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. नवनीत द्विवेदी के नेतृत्व में कबीरधाम जिले के लोकप्रिय एवं प्रसिद्ध चिल्फी घाटी, रानीदहरा जलप्रपात भोरमदेव शासकीय शक्कर कारखाना एवं भोरमदेव मंदिर का फील्ड सर्वे (भौगोलिक भ्रमण) पूर्ण किया। सर्वप्रथम यह सर्वे टीम स्पेशल बस द्वारा भाटापारा से मैकल पर्वत श्रृंखला में समुद्र तल से 807 मीटर की ऊॅचाई पर स्थित हिल स्टेशन चिल्फी घाटी पहुंची, जहॉ के घने जंगलों, जैव विविधता, घुमावदार मार्गो एवं मनोहारी दृश्यों को देख विद्यार्थीगण रोमांचित हुए।
इसके पश्चात वे लगभग 02 कि.मी. का पथरीला ट्रैक व 200 सीढ़ी चढ़कर रानीदहरा जलप्रपात पहुॅचे जहॉ के तीन स्तरीय प्रपात व जल के अपरदन से विदीर्ण चट्टानों का अध्ययन किया। यह क्षेत्र भी अनेक औषधीय पौधों एवं वन्य जीवों के लिए प्रसिद्ध है। रानीदहरा (रानीधारा) जलप्रपात एक मौसमी जलप्रपात है जो वर्षा ऋतु में अपने पूर्ण सौंदर्य में होता है। इसके पश्चात यह सर्वे टीम भोरमदेव शासकीय शक्कर कारखाना पहुॅची जहॉ शक्कर निर्माण से संबंधित जानकारी प्राप्त की। इस रास्ते में अनेक संख्या में गन्ने से गुड़ निर्मित करने वाले इकाईयों का भी किया। अंत में यह सर्वे टीम प्राचीन एवं सुप्रसिद्ध भारेमदेव मंदिर पहुंची जो कि भगवान शिव को समर्पित है। जिसे छत्तीसगढ़ के खजुराहो के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर 11 वीं शताब्दी के नागर शैली में निर्मित है जिसे नागवंशी राजा गोपालदेव ने बनवाया था। यह मैकल श्रेणी की तलहटी में एक सुंदर तालाब के किनारे बसा है। इस मंदिर के पत्थरों पर की गई सूक्ष्म नक्काशी उस समय की उन्नत शिल्पकला का प्रमाण है। इस फील्ड सर्वे से विद्यार्थियों को पर्यावरण अध्ययन, प्राकृतिक सौंदर्य, जल के अपरदन कार्य, भौगोलिक लैण्डस्केप व प्राचीन मंदिर निर्माण कला के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई।