गुरुर ब्लॉक में अवैध ईंट भट्ठों का जाल, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

(दीपक देवदास)

बिना लाइसेंस संचालित भट्ठों से पर्यावरण को नुकसान, किसानों की उपजाऊ जमीन हो रही बर्बाद
गुरुर। गुरुर (GURUR) ब्लॉक के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों और नदी किनारों पर बिना लाइसेंस संचालित लाल ईंट भट्ठों का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। हैरानी की बात यह है कि इन अवैध गतिविधियों के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आ रही है। नियमों को दरकिनार कर संचालित हो रहे इन भट्ठों से न केवल शासन को लाखों रुपये के राजस्व (REVENUE) की हानि हो रही है, बल्कि पर्यावरण (ENVIRONMENT), वन संपदा (FOREST WEALTH) और किसानों की उपजाऊ भूमि (FERTILE LAND) पर भी गंभीर असर पड़ रहा है।

गुरुर ब्लॉक के ग्राम कुलिया, भेजा, नवागांव, डोकला, मोखा, सालहेभाट, भरदा, छेड़िया, धनोरा, रमतरा, सोरर, सनौद, कंवर, पेंडरवानी, बोहाराडीही, बोहाररा, डोटोपार, दियाबाती, धनेली और बोडरा सहित कई गांवों में अवैध ईंट निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है।

बिना अनुमति बेखौफ संचालन
सूत्रों के अनुसार कई भट्ठा संचालक बिना वैध लाइसेंस, बिना राजस्व अनुमति और बिना छत्तीसगढ़ राज्य पर्यावरण संरक्षण मंडल की स्वीकृति के ईंट निर्माण कर रहे हैं। नियमानुसार किसी भी ईंट भट्ठे के संचालन के लिए राजस्व विभाग (REVENUE DEPARTMENT), ग्राम पंचायत (GRAM PANCHAYAT), प्रदूषण नियंत्रण मंडल (POLLUTION CONTROL BOARD) और आवश्यकतानुसार खनिज विभाग (MINERAL DEPARTMENT) से अनुमति लेना अनिवार्य होता है। इसके बावजूद कई स्थानों पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर या बिना किसी अनुमति के भट्ठे संचालित किए जा रहे हैं।

जहरीले धुएं से बढ़ रही बीमारियां
इन भट्ठों से निकलने वाला घना काला धुआं आसपास के गांवों में फैल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों में खांसी, दमा और अन्य श्वास संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं। बिना मानक चिमनी और प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों के चल रहे ये भट्ठे वायु गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित ईंट भट्ठे स्थानीय पारिस्थितिकी संतुलन को बिगाड़ते हैं और लंबे समय में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर संकट पैदा कर सकते हैं।

किसानों की उपजाऊ जमीन पर खतरा
सबसे गंभीर मामला किसानों की जमीन से जुड़ा हुआ है। ईंट निर्माण के लिए खेतों की ऊपरी उपजाऊ मिट्टी (टॉप सॉइल) को बड़े पैमाने पर खोदा जा रहा है। किसानों का आरोप है कि बिना अनुमति खेतों से मिट्टी निकाली जा रही है, जिससे जमीन की उर्वरता कम हो रही है और भविष्य में खेत बंजर होने का खतरा बढ़ गया है।
खनन विभाग (MINING DEPARTMENT) की जिम्मेदारी है कि अवैध मिट्टी उत्खनन पर रोक लगाए, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आई है।

वन संपदा पर भी खतरा
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई ईंट भट्ठों में ईंधन के रूप में अवैध रूप से काटे गए पेड़ों का इस्तेमाल किया जा रहा है। आम, इमली और बबूल जैसे पेड़ों को काटकर भट्ठों में झोंका जा रहा है। यदि यह आरोप सही है तो यह वन अधिनियम का गंभीर उल्लंघन है।

इस मामले में वन विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वन परिक्षेत्र के अधिकारी, डिप्टी रेंजर (DEPUTY RANGER) और वन रक्षक (FOREST GUARD) नियमित निरीक्षण नहीं कर रहे हैं, जिससे अवैध कटाई और परिवहन पर रोक नहीं लग पा रही है।

मिलीभगत के आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव-गांव में नए ईंट भट्ठे खोले जा रहे हैं और उनका संचालन किया जा रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि तहसील कार्यालय (TEHSIL OFFICE) गुरुर के कुछ अधिकारी-कर्मचारियों से साठगांठ के कारण ही यह कारोबार खुलेआम चल रहा है। पहले जहां ईंट निर्माण का काम सीमित रूप से कुम्हार समुदाय तक था, वहीं अब अन्य लोग भी बड़े पैमाने पर ईंट भट्ठों का संचालन कर रहे हैं।

प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार संबंधित विभागों को इसकी जानकारी दी गई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता ही की गई। यदि निष्पक्ष जांच हो तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
यह मामला केवल अवैध कारोबार का नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण, राजस्व हानि और ग्रामीणों के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय बन गया है।

ग्रामीणों की मांग
जिले के सभी ईंट भट्ठों की संयुक्त टीम से जांच कराई जाए।
बिना लाइसेंस संचालित भट्ठों को तत्काल सील किया जाए।
अवैध मिट्टी उत्खनन और वृक्ष कटाई पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए।
प्रदूषण नियंत्रण मानकों का सख्ती से पालन कराया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन अब भी मौन रहा तो यह आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य और पर्यावरण के साथ अन्याय होगा। अब क्षेत्र की जनता यह जानना चाहती है कि अवैध ईंट भट्ठों पर कार्रवाई आखिर कब होगी।

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