रात में लूटी जा रही “माँ महानदी” आरंग के घाटों पर रातभर मशीनों से अवैध रेत खनन, प्रशासन की चुप्पी पर गंभीर सवाल
(नीलकमल आजाद)
पलारी। दिन में शांत बहने वाली महानदी (MAHANADI) रात के अंधेरे में कथित तौर पर खनिज माफियाओं के कब्जे में चली जाती है। रायपुर जिले (RAIPUR DISTRICT) के आरंग (AARANG) क्षेत्र में आधी रात के बाद भारी मशीनें नदी के भीतर उतरती हैं और हाईवा ट्रकों की कतारें रेत भरकर निकलती रहती हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि चिखली (CHIKHALI), कुरूद (KURUD) और हरदीडीह (HARDIDIH) घाटों पर रातभर अवैध रेत उत्खनन जारी रहता है। सुबह होने से पहले सैकड़ों ट्रिप रेत घाटों से बाहर भेज दी जाती हैं।
“एक्सपोज़ नियमों को खुली चुनौती”
नियमों के अनुसार नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के निर्देशों में शाम 7 बजे के बाद नदी से रेत खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है।
इसके बावजूद ग्रामीणों द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो और तस्वीरों में रात के समय मशीनों से उत्खनन होते दिखाई देने का दावा किया गया है।
“आस्था पर भी चोट”
ग्रामीणों का कहना है कि
•नदी के तट
•बाढ़ सुरक्षा टापू
•और अंतिम संस्कार स्थलों के आसपास की जमीन से भी रेत निकाली जा रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार यह स्थिति उनकी धार्मिक आस्था और परंपराओं के लिए गहरी पीड़ा का कारण बन रही है।
सरकार तक पहुंची शिकायत इस पूरे मामले को उठाते हुए आम आदमी पार्टी (AAM AADMI PARTY) के नेता और पूर्व जिला पंचायत सदस्य परमानंद जांगड़े (PARMANAND JANGDE) ने छत्तीसगढ़ शासन (CHHATTISGARH GOVERNMENT) के मुख्य सचिव, खनिज साधन विभाग और रायपुर कलेक्टर (RAIPUR COLLECTOR) गौरव सिंह (GAURAV SINGH) को शिकायत पत्र प्रेषित किया है।
जांगड़े ने मांग की है कि:
•महानदी घाटों पर चल रही अवैध रेत उत्खनन की निष्पक्ष जांच कराई जाए
•रात्रिकालीन खनन पर सख्ती से कार्यवाही किया जाये रात्रि कालीन चल रहे रेत खनन पर तत्काल रोक लगाई जाये !
•अवैध खनन पर रॉयल्टी और जुर्माना वसूला जाए
•जिम्मेदार अधिकारियों और पट्टाधारकों पर कड़ी कार्रवाई हो
महानदी खनन का काला कारोबार
आरंग क्षेत्र के चिखली, कुरूद और हरदीडीह घाट
नियम क्या कहते हैं?
NGT के अनुसार शाम 7 बजे के बाद नदी से रेत खनन प्रतिबंधित
आरोप क्या हैं?
रातभर मशीनों से अवैध रेत उत्खनन।
संभावित नुकसान
पर्यावरणीय क्षति और शासन को लाखों रुपये का राजस्व नुकसान
“ग्रामीणों की आवाज”
रात होते ही घाटों पर मशीनें उतर जाती हैं। सुबह तक ट्रकों की लाइन लगी रहती है। अगर यही चलता रहा तो महानदी का स्वरूप बदल जाएगा।”









