महंत नैनदास महिलांग छग के प्रथम गौ रक्षक एवं सामाजिक जागरण के प्रणेता थे —मोहन‌बंजारे

7 जनवरी जयंती पर कोटि कोटि नमन

(मदन खाण्डेकर)

गिधौरी। राजमहंत नैन दास महिलांग का जन्म 7जनवरी 18 81 में ग्राम सलौनी बलौदा बाजार में हुआ था। पिता का नाम महंत राजा राम महिलांग व माता का नाम श्रीमती गायत्री बाई था। पिता एक बड़े संपन्न कृषक थे।नैनदास ग्रामीण परिवेश में ज्यादा पढाई नहीं कर सकें लेकिन उन्हें गुरुओं की वानी ने बहुत प्रभावित किया था जिससे वे समाज सुधार में लग गए और समाज में सुधार लाने के लिए अठगवां कमेटी का निर्माण किया एवं सतनामी महासभा का प्रचार प्रसार किया।इस प्रकार समाज सेवा के माध्यम से राष्ट्रीय आन्दोलन से जुड़ गए।वे गुरु गोसाईं मुक्तावन दास एवं अगमदास गुरु मिनी माता सहित पंडित सुंदरलाल शर्मा के संपर्क में आए ।1914 में ही वे गोवध बंदी आन्दोलन का शुरुवात किया उन्होंने बुचड़ खाने को बंद कराने के लिए आन्दोलन शुरू किया 1917मे पंडित सुंदरलाल शर्मा एवं मदन ठेठवार आदि नेताओं के साथ बुचड़ खाने बंद कराने के मुहिम चलाने लगे जिससे बलौदा बाजार के कामेट एवं बोधनी कसाई बुचड़ खाने बंद हो गए। दयानंद सरस्वती की प्रेरणा से स्थापित गौरक्षण समिति की एक शाखा इनके द्वारा नागपुर में स्थापित किया गया। छत्तीसगढ़ में सतनामी समाज के राजमहंत नैनदास महिलांग, अंजोर दास राजमहंत,महंत रतिराम मालगुजार आदि के द्वारा इस सभा की स्थापना किया गया। बलौदा बाजार के करमंडीह तथा ढाबाडीह में कसाई खाने का संचालन ब्रिटिश सरकार से लाइसेंस प्राप्त कर जौकर नाम व्यक्ति द्वारा किया जा रहा था हज़ारों मवेशियों को कांटे जानें से महंत नैनदास महिलांग जी काफ़ी व्यथित हुए।और इसे बंद कराने का प्रतिज्ञा ले लिया।एक ओर क़साई खाने को बंद कराने मुहिम चला रहे थे वहीं दूसरी ओर गांव गांव जाकर लोगों को बुचड़ खाने क़साई खाने में काम न करने लोगों को प्रेरित करतें रहें। इससे सैकड़ों गांवों की रक्षा हुई एवं बुचड़ खाने को मजदूरों का अभाव होने लगा जिसके कारण उनका काम ढप हो गए। उनका यह आन्दोलन असहयोग आंदोलन के समय और तेज हो गया।

राष्ट्रीय भावना के कारण मजदूरों ने कसाई बुचड़ खाने में काम करना बंद कर दिया। अनंत:1924 में ब्रिटिश संरक्षण वाले इस बुचड़ खाने को तोड़ दिया गया।नैनदास जी को छत्तीसगढ़ का गौ सपूत से विभूषित किया गया ।27जनवरी 1926को सतनामी महासभा छत्तीसगढ़ क्षेत्र के अध्यक्ष माननीय रतिराम मालगुजार, सचिव श्री अंजोर दास एवं राजमहंंत नयनदास महिलांग ने जगतगुरु अगम दास जी के अगुवाई में एक संयुक्त ज्ञापन मध्यप्रदेश एवं बरार क्षेत्र के गवर्नर माण्टग्यू बटलर को बिलासपुर में ज्ञापन सौंपकर सतनामी समाज के तत्कालीन समस्याओं एवं मांगों से अंग्रेज सरकार के समक्ष रखा गया। जिसमें प्रमुख मांगे सतनामियो को सिर्फ सतनामी कहां जाएं 2.सतनामियो को दूसरे के अत्याचार से मुक्त किया जाए।3काम के बदले मजदूरी एवं कानूनी संरक्षण दे।4 बच् को भेदभाव रहित शिक्षा दिया जाएं।5.किसानो को बेगारी से मुक्त किया जाए। राजनीति में पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने सहित प्रमुख मांग सम्मिलित थे। अंग्रेज़ी सरकार ने सभी मांगों को मान ली थी। सन 1933 में गांधी जी के दूसरे बार आगमन पर नैनदास जी के कार्यों की जानकारी दिए जाने पर गांधी जी ने बहुत प्रशंसा किया था। मध्य प्रान्त के प्रमुख नेता मुंजे, राष्ट्रीय नेता मदनमोहन मालवीय,लाला लाजपत राय आदि के हस्ताक्षर युक्त उन्हें सम्मान पत्र प्रदान किया। महंत नैनदास महिलांग ने अपने प्रयास से गांव गांव में राष्ट्रीय एवं सामाजिक चेतना का प्रसार कर समाज के लोगों को राष्ट्रीय एवं सामाजिक आन्दोलन से जोड़ा।1941के व्यक्ति सत्याग्रह करतें हुए 6 माह की कारावास की सज़ा कांटी।इस तरह भारत छोड़ो आंदोलन का नेतृत्व करने के कारण गिरफ्तार कर 6 माह का कारावास दिया गया। राष्ट्रीय आन्दोलन में प्रमुख योगदान एवं सामाजिक परिवर्तन के लिए जनजागरण के कार्यो के छत्तीसगढ़ अंचल में महंत नैनदास महिलांग जी लोकप्रिय हो गए। प्रदेश एवं राष्ट्रीय नेतृत्व ने उनकी प्रतिभा को पहचान कर 1937 के चुनाव में उन्हें बलौदा बाजार पलारी क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया।और वे मध्यप्रान्त के कौंसिल में सदस्य निर्वाचित हुए।16 अप्रैल 1959को उनकी मृत्यु हुई।महंत नैनदास महिलांग जी के प्रयास से समाज के लिए बस स्टैंड के पास भूमि आरक्षित कर समाज के नाम कराने प्रयास किया।आज भी बस स्टैंड के पास महंत नैनदास महिलांग के स्मृति में भवन है जहां पर समाज के लोग विभिन्न समाजिक गतिविधियों को संचालित करतें हैं।ऐसे महान सपुत छत्तीसगढ़ के प्रथम गौ रक्षक सरकारी उपेक्षा में है ना उनके नाम से स्कूल कालेज, गार्डन, चौक चौराहे का नाम करण नहीं है। कहीं हम अपने महान समाज सेवक को भूल ना जाएं।।छत्तीसगढ़ के प्रथम गौ रक्षक, समाज सेवक, स्वतंत्रता सेनानी, समाजिक आन्दोलन के प्रणेता को 7जनवरी जन्मदिन जयंती के अवसर पर कृतज्ञता पूर्ण कोटि कोटि नमन विनम्र श्रद्धां सुमन।।

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