मिनी माता वात्सल्य करुणा एवं त्याग की प्रतिमूर्ति थी –मोहन बंजारे

प्रथम महिला सांसद को जंयती के अवसर पर शत् शत् नमन 

छत्तीसगढ़ के नवनिर्माण में ममतामयी मिनी माता जी का अमूल्य योगदान

मदन खाण्डेकर 

रायपुर –‌ मिनीमाता जी (1913- 1972)छत्तीसगढ़ की एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी समाज सुधारक और राज्य की पहली महिला सांसद (1952 -1972) थी वह अविभाजित मध्यप्रदेश के प्रथम महिला सांसद ममतामई मिनीमाता जी का जन्म 13 मार्च सन 1913 को असम राज्य के जिला नवागांव के ग्राम जमुनामुख में हुआ। मिनी माता जी का बचपन का नाम मिनाक्षी देवी था।पिता का नाम राजमहंत बुधारी दास व माता का नाम देवमती बाई थी। छत्तीसगढ़ मध्य प्रान्त में भयानक अकाल के कारण मिनी माता के दादा पलायन में छत्तीसगढ़ मुंगेली के ग्राम सगुना से असम के चाय बगान दौलतपुर में विस्थापित हो गए।

 

मिनी माता जी का प्राथमिक शिक्षा एवं कक्षा सातवीं तक शिक्षा असम में ही हुई। इसके बाद मैट्रिक तक शिक्षा छत्तीसगढ़ में ग्रहण की। उन्हें हिन्दी, अंग्रेजी एवं बांग्ला भाषा का बहुत अच्छा ज्ञान था। छत्तीसगढ़ से धर्म गुरु गुरु गोसाईं सतनामी समाज के लोगो का हाल चाल जानने असम राज्य चाय बगान में जाया करते थे। ऐसे ही जगत गुरु अगमदास जी दौलतपुर पहुंचे थे । जहां पर महंत बुधारी दास के पुत्ती मिनाक्षी से 1932 में विवाह हुआ। विवाह उपरांत गुरु अगमदास जी के साथ मिनी माता छत्तीसगढ़ लौट आए।इस प्रकार साधारण परिवार में जन्मे एक बालिका मिनाक्षी से गुरु माता मिनी माता हो गई। रायपुर लौटने के बाद गुरु निवास लोधी चौक में रहने लगी। छत्तीसगढ़ के सभी समाज के नेताओं एवं समाज के लोगो तथा महंत गणों का आये दिन गुरु निवास में आगमन होता था।जिसका आदर मान सम्मान ममतामयी मिनी माता जी अपने परिवार के सदस्य के रुप सेवा करती थी।स्वतंत्रता की लड़ाई में भाग लेने रणनीति पर विचार विमर्श करनें प्रमुख गण आते थे।सभी के गुरु माता आदर सत्कार करतीं थी। गुरु अगमदास के अनुपस्थित में समाज के लोगो की समस्याएं सुनते एवं समाधान के लिए चर्चा करतीं थी। स्वतंत्रता आन्दोलन के लिए लोगों के इक्ट्ठा होने के लिए गुरु निवास प्रमुख केन्द्र था। गुरु अगमदास कांग्रेस के पदाधिकारी थे जिसके साथ विभिन्न कार्यक्रम में दलित उत्थान, राष्ट्रीय आन्दोलन, सामाजिक उत्थान के कार्यक्रम में भी सामिल रहतीं थी। गुरु अगमदास जी संविधान सभा के सदस्य थे।तथा प्रथम संसद के भी सदस्य थे।1952में गुरु अगमदास दास जी के निधन के पश्चात रिक्त हुई संसदीय क्षेत्र से समाज के लोगो के आग्रह पर एवं तत्कालीन नेता पं रविशंकर शुक्ल एवं तत्कालीन जनप्रतिनिधियों के निवेदन पर राजनीति में प्रवेश के लिए तैयार हुए। उपचुनाव में जीत हासिल कर 1952मे अविभाजित मध्यप्रदेश के छत्तीसगढ़ के रायपुर से प्रथम महिला सांसद बनने का गौरव हासिल किया।1957 में पुनः संयुक्त संसदीय क्षेत्र रायपुर बिलासपुर और दुर्ग से जीत कर सांसद बनीं।1962 में पुनः जांजगीर से सांसद निर्वाचित हुई।1967 में जांजगीर लोकसभा क्षेत्र से पिछले मतों से और अधिक मतों से चुनाव जीत कर सांसद पहुंची।वे प्रधानमंत्री पं जवाहरलाल नेहरू,पं रविशंकर शुक्ल के करीबी हो गई। मिनी माता जी ने सांसद सदस्य के रूप में संसद में अस्पृश्यता बील पेश कर समाज में व्याप्त छुआछूत को दूर करने पहल किया। छत्तीसगढ़ सांस्कृतिक कल्याण मंडल के अध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ मजदूर कल्याण मंडल जो भिलाई में है का संस्थापक अध्यक्ष थीं। गुरु घासीदास सेवा संघ हरिजन एजूकेशन सोसायटी की अध्यक्ष व राज्य दलित वर्ग लीग की उपाध्यक्ष थी। उन्होंने समाज की उत्थान के लिए अनेक छात्रावास का स्थापना करके बच्चों की शिक्षा के क्षेत्र के साथ ही साथ भिलाई स्टील प्लांट में छत्तीसगढ़ के लोगों को भारी संख्या में नौकरी दिलाने में भी हम भूमिका निभाई।उन्होंने संसदीय कार्य के अतिरिक्त समाज के गरीबी, पिछडेपन अशिक्षा छूआछूत को दूर करने निरंतर प्रयास किया। मजदूरों के उत्थान,नारी शिक्षा, बालविवाह दहेज प्रथा को दूर करने संसद में आवाज़ बूंलद किया।कृषि तथा सिंचाई के लिए हसदो बांगो परियोजना उसी की दूरदर्शिता की देन है।भिलाई इस्पात संयंत्र में लोगों को प्रशिक्षण एवं रोजगार दिलाने में मिनी माता जी का महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। मिनी माता जी का दिल्ली एवं रायपुर का आवास छत्तीसगढ़ के सभी वर्गों के लिए आश्रय स्थल थे । सभी के लिए स्नेह, ममत्व की भाव रखतीं थीं। अपने बच्चों के समान स्नेह किया करतीं थीं इसी कारण मिनी माता ममतामई मिनी माता हो गई । 11अगस्त 1972को भोपाल से दिल्ली जातें वक्त पालम हवाई अड्डे के पास विमान दुर्घटना में मिनी माता का निधन हो गया।निधन के समाचार सुनकर छत्तीसगढ़ वासी एवं समाज में दुःख की लहर दौड़ पड़ी। सतनामी समाज मिनी माता को खोने के बाद अपने आप को असहाय महसूस करने लगी। सांसद रहते ममतामई मिनी माता छत्तीसगढ़ में राजनैतिक जागरण,शिक्षा, दहेज़ प्रथा, बालविवाह दूर करने सहित रोजगार,कृषि के क्षेत्र अमूल्य योगदान दी । अकाल मृत्यु के आगोश में मिनी माता जी नहीं समाते तों आज छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ में सतनामी समाज का अलग ही स्थान होता। मिनी माता वात्सल्य करुणा एवं त्याग की प्रतिमूर्ति थी। छत्तीसगढ़ में प्रथम महिला सांसद का जो स्थान होना चाहिए आज उपेक्षा की शिकार है। उनके नाम पर विधानसभा भवन का नामकरण अता पता नहीं है। आज 13 मार्च जन्म दिवस जयंती के अवसर पर कोटि कोटि नमन विनम्र श्रद्धां सुमन अर्पित। जयंती के अवसर पर आपके अमूल्य योगदान के लिए छत्तीसगढ़ वासियों की ओर से कृतज्ञता प्रकट करतें हैं ।। गुरुमाता ममतामई मिनी माता जी को जन्म जंयती पर

कोटि कोटि नमन विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित।

मोहन बंजारे

प्रदेश महासचिव 

प्रगतिशील छग सतनामी समाज






इन्हें भी पढ़े