कर्म का फल भोगना ही पड़ता है- पूज्या श्रद्धा दीदी जी भगवान सदैव भावग्राही होते हैं- पूज्या श्रद्धा दीदी जी 

मदन खाण्डेकर

बिलाईगढ। मुख्यालय से लगे ग्राम गोविंदवन विकासखंड बिलाईगढ़ में आयोजित संगीतमयी श्रीमद् भागवत कथा के दौरान सिमगा छत्तीसगढ़ से आई हुई कथावाचिका श्रद्धा दीदी जी ने कहीं कि, किए हुए कर्म का फल भोगना ही पड़ता है। “अवश्यमेव भोगतव्यम क्रितम कर्म शुभाशुभं।” हमें इस संसार में दुख देने वाला कोई नहीं है। अपने ही द्वारा किए हुए कर्मों का परिणाम अनुकूल या प्रतिकूल परिस्थिति के रूप में हमें प्राप्त होता है ।श्रीरामचरितमानस में प्रातः स्मरणीय पूज्यपाद गोस्वामी तुलसीदास जी लिखते हैं कि–काहु न कोऊ सुख दुख कर दाता। निज कृत कर्म भोग सब भ्राता।कर्म प्रधान विश्व रचि राखा ।जो जस करइ सो तस फल चाखा।।

पूज्या श्रद्धा दीदी जी ने श्रीमद्भागवत महापुराण के अंतर्गत सुकदेव प्राकट्य, भीष्म पारायण, परीक्षित जन्म एवं परीक्षित श्राप की कथाओं को विस्तार से अपनी मधुर, सरस और ओजमयी वाणी में कह कर श्रोता समाज को सुनाई। बीच-बीच में मधुर संकीर्तन के साथ कथा सुनाती हुई आगे बताई कि भगवान सदैव भाव ग्राही होते हैं ।भक्ति का विश्लेषण करती हुई बोली कि भगवान का हो जाए वही भागवत है। भगवान के निवास का नाम भागवत है ।भगवान के उपदेश का नाम भागवत है। इसलिए भगवान से जो संबंध जोड़ ले वह भागवत हो जाता है।

यह सप्त दिवसीय संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा स्वर्गीय रामेश्वर साहू, स्वर्गीय बिटावन बाई साहू के स्मृति शेष में अधिवक्ता एवं नोटरी रामसहाय साहू- श्रीमती निर्मला साहू द्वारा आयोजित है ।कथा दिनांक 27 /०1/ 2026 मंगलवार को कपिला तर्पण, यज्ञ पूर्णाहुति के साथ विश्राम लेगी। कथा आयोजक रामसहाय साहू- श्रीमती निर्मला साहू एवं कथा वाचिका पूज्या श्रद्धा दीदी जी ने अधिक से अधिक लोगों को आकर इस कथा से लाभ उठाने के लिए निवेदन किए हैं। कथा प्रतिदिन दोपहर 1:00 से शाम 5:00 बजे तक चल रही है।