Supreme Court: ब्रेन डेथ घोषित करने की प्रक्रिया पर सवाल, सुप्रीम कोर्ट ने एम्स से मांगी रिपोर्ट

  Supreme Court:  ब्रेन डेथ घोषित करने की प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है. अदालत ने एम्स को निर्देश दिया है कि मेडिकल विशेषज्ञों की एक समिति गठित कर इस विषय पर वैज्ञानिक, पारदर्शी और भरोसेमंद प्रक्रिया को लेकर रिपोर्ट पेश की जाए. यह आदेश जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के दौरान दिया. अदालत ने कहा कि इस संवेदनशील विषय पर स्पष्ट और विश्वसनीय मानकों की जरूरत है, ताकि मरीजों और उनके परिजनों के अधिकार सुरक्षित रह सकें.

यह मामला केरल के डॉक्टर एस. गणपति द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है. याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि कई मामलों में मरीज की प्रत्यक्ष जांच किए बिना ही उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया जाता है. उनका आरोप है कि मौजूदा प्रक्रिया में कई खामियां हैं और कई बार जल्दबाजी में निर्णय लिए जाते हैं. उन्होंने अदालत के सामने एक मामले का उदाहरण रखते हुए कहा कि एक मरीज को बिना शारीरिक परीक्षण के ब्रेन डेड घोषित किया गया और अंगदान के लिए दबाव बनाया गया.

डॉ. गणपति ने कहा कि वर्तमान में इस्तेमाल होने वाला एप्निया टेस्ट पूरी तरह विश्वसनीय नहीं माना जा सकता. उनके अनुसार ब्रेन एंजियोग्राम और ईईजी जैसे परीक्षण अधिक वैज्ञानिक और भरोसेमंद हैं, क्योंकि ये सीधे मस्तिष्क में रक्त प्रवाह और उसकी गतिविधि को मापते हैं. उन्होंने अदालत से मांग की कि ब्रेन डेथ घोषित करने के लिए आधुनिक तकनीकों को अनिवार्य किया जाए.

सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि कानून में पहले से एक निर्धारित प्रक्रिया मौजूद है, जिसमें एप्निया टेस्ट और वीडियो रिकॉर्डिंग शामिल है. यदि तय प्रक्रिया का पालन नहीं हो रहा है तो वह अलग मुद्दा है. अदालत के सामने मुख्य सवाल यह है कि ब्रेन डेथ घोषित करने के लिए सबसे उपयुक्त, पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीका कौन सा होना चाहिए.
केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने बताया कि अंग प्रत्यारोपण अधिनियम के तहत राज्यों को मेडिकल बोर्ड गठित करने का अधिकार है और वर्तमान प्रक्रिया पहले से तय है. इसके बाद अदालत ने डॉ. गणपति को अपने सुझाव लिखित रूप में देने को कहा. साथ ही एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग प्रमुख को 3 से 5 विशेषज्ञों की समिति बनाने का निर्देश दिया गया है. यह समिति सुझाए गए परीक्षणों की सुरक्षा, उपयोगिता और व्यवहार्यता पर अपनी रिपोर्ट देगी. रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत में पेश की जाएगी. मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी.
इस बीच डॉ. गणपति ने एक अलग याचिका भी दायर की है, जिसमें एक मरीज को ब्रेन डेड घोषित किए जाने को चुनौती दी गई है. उस मामले की सुनवाई फिलहाल स्थगित है और वर्तमान याचिका पर निर्णय के बाद ही आगे सुनवाई होगी. सुप्रीम कोर्ट के इस कदम को मेडिकल सिस्टम और अंगदान प्रक्रिया में पारदर्शिता की दिशा में अहम माना जा रहा है.