तुरतुरिया में 3 दिवसीय मेला सम्पन्न, भक्तों ने माता का किया दर्शन, प्रशासन की टीम रही मौजूद
(नीलेश शर्मा)
कसडोल। लव कुश की तपोभूमि कहे जाने वाले तुरतुरिया में पौष पूर्णिमा में छेरछेर त्यौहार को तीन दिन का भव्य मेला का आयोजन सफल रहा। जहाँ देखने दूर दूर से लोग पहुँचे थे, तुरतुरिया पहाड़ पर विराजमान संतानदायनी मातागढ़ दाई के नाम से भी प्रसिद्ध है। मातागढ़ मंदिर में लोग अपनी संतान प्राप्ति की मनोकामना लेकर आते है, कहते है कि यहां पर सभी की मनोकामना पूरी होती है कुंवार और चैत्र की नवरात्रि में लोग हजारों की संख्या में माता के दर्शन करने पहुंचते है यहां हर नवरात्र में सैकड़ों की संख्या में भक्तों के द्वारा ज्योत जलाई जाती है। पौष पूर्णिमा के दूसरे दिन मेले में लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मेले को देखते हुए प्रशासन की व्यवस्था भी चाकचौबंद थी, इस दौरान कसडोल एसडीएम रामरतन दुबे, तहसीलदार विवेक पटेल, जनपद सीईओ कमलेश साहू, वनविभाग से जयकिशन यादव पुलिस विभाग से स्वस्थ विभाग से जनपद पंचायत के सभी अधिकारी मौजूद थे।

“मेले में उमड़ी भीड़”
पौष पूर्णिमा में लगें मेले में लाखों श्रद्धालु अपनी मन्नते पूरी होने पर पहाड़ा वाली मां काली का दर्शन करने पहुँचते हैं। मेले में कई दुकानें लगी रही। कसडोल क्षेत्र के तुरतुरिया में पौष पूर्णिमा में प्रति वर्ष तीन दिवसीय मेले का आयोजन किया जाता है, इस वर्ष आने वाले श्रद्धालुओं के लिए खास सुरक्षा और आवागमन की व्यवस्था किया गया था मान्यता अनुसार बलभद्र कुंड से निकलने वाला जल गौ मुख से निकलता है और तुरतुर तुरतुर की जल की ध्वनि के कारण इस स्थल का नाम तुरतुरिया पड़ा है। वही इसे लवकुश की जन्म स्थली कहा जाता है। माता गढ़ में मां काली की प्रतिमा विराजमान है जिसे संतान दात्री के रूप में जाना जाता है। श्रद्धालु माता के चरणों में माथा टेक कर जाते हैं और श्रद्धालु माता से मन्नत मांगने आते हैं एवं पूर्ण होने पर धन्यवाद देने उनके दरबार पर पुनः आते हैं। मेला स्थल पूर्णतः जनपद पंचायत की देख रेख में संचालित किया जाता है। मेला स्थल में इस वर्ष श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पर्याप्त पुलिस बल के साथ चाक चौबंद व्यवस्था किया गया था। मेले में स्वास्थ्य विभाग की भी टेंट लगी हुई थी विशेष परिस्थिति में प्राथमिक उपचार के साथ स्वास्थ्य सुविधा मुहैया किया जा सके।


