कार्तिकेय जन्म, तारकासुर वध एवं गणेश जन्म की दिव्य कथा का हुआ भावपूर्ण वर्णन

(दीपक देवदास)

गुरुर। ग्राम तमोरा (सुर्रा) में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के अवसर पर प्रसिद्ध कथावाचक पंडित आकाश कृष्ण शास्त्री जी ने कार्तिकेय (स्कंद/सुब्रह्मण्य) जन्म, तारकासुर वध तथा गणेश जन्म की पौराणिक कथाओं का अत्यंत भावपूर्ण एवं सरल शब्दों में वर्णन किया। कथा श्रवण हेतु क्षेत्रभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

कथावाचन के दौरान पंडित जी ने बताया कि असुर तारकासुर को यह वरदान प्राप्त था कि उसका वध केवल भगवान शिव एवं माता पार्वती के पुत्र द्वारा ही संभव होगा। देवताओं को तारकासुर के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से शिव-पार्वती के मिलन से उत्पन्न तेज को अग्निदेव ने धारण कर गंगा में प्रवाहित किया। गंगा के माध्यम से यह तेज छह कमल पुष्पों में अवतरित हुआ, जिनका पालन छह कृतिकाओं (ऋषि पत्नियों) ने किया। इन छह बालकों के एक होने से षडानन रूपी कार्तिकेय का जन्म हुआ, जिन्हें कृतिकाओं द्वारा पाले जाने के कारण कार्तिकेय कहा गया।

देवताओं ने कार्तिकेय को अपना सेनापति नियुक्त किया और उन्होंने जन्म के सातवें दिन ही तारकासुर का वध कर देवताओं को उसके आतंक से मुक्त कराया। कथा में आगे बताया गया कि कार्तिकेय के जन्म एवं तारकासुर वध के पश्चात माता पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से भगवान गणेश को उत्पन्न किया। एक अन्य मान्यता के अनुसार शिव-पार्वती के प्रेम तथा शिव के क्रोध को शांत करने के लिए भी गणेश का अवतरण हुआ। इस प्रकार कार्तिकेय जन्म, तारकासुर वध और गणेश जन्म की कथाएं आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं।

कार्यक्रम में सुशिल साहू, अग्र सिंह गंजीर, डिम्पल साहू, सुनील साहू, सुषमा साहू, बी.आर. सांडिल, कृष्णा साहू, सहिल पटेल, डोमार साहू, सुकदेव निषाद, बिसेसर साहू, डॉ. बिरेन्द्र साहू, अजय निषाद, परसु पटेल सहित ग्राम एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।






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