ऐतिहासिक स्वागत से अभिभूत हुई ‘विशाल सतनाम सद्भाव पदयात्रा’, कसडोल में उमड़ा जनसैलाब
कसडोल। सामाजिक समरसता और बाबा गुरु घासीदास जी के संदेशों को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से निकाली जा रही ‘विशाल सतनाम सद्भाव पदयात्रा’ जब कसडोल पहुंची, तो वहां का नजारा ऐतिहासिक और भक्तिमय हो गया। पदयात्रा के आगमन पर नगरवासियों और ग्रामवासियों ने जिस आत्मीयता से स्वागत किया, उसने यात्रा के उत्साह को दोगुना कर दिया है। यात्रा के कसडोल की सीमा में प्रवेश करते ही ग्रामीणों ने पलक-पावड़े बिछाकर यात्रियों का अभिनंदन किया। चारों ओर से हो रही पुष्पवर्षा और “बाबा गुरु घासीदास की जय” के नारों से पूरा वातावरण जोश और ऊर्जा से भर गया। बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, हर वर्ग के चेहरे पर अपार स्नेह और श्रद्धा का भाव स्पष्ट नजर आ रहा था।

पदयात्रा के दौरान सबसे मुख्य आकर्षण एकता का वह उद्घोष रहा जिसने आकाश गुंजा दिया— “बोल रहा अब हिंदुस्तान, मनखे–मनखे एक समान”। इस नारे के साथ समानता और भाईचारे का संदेश दूर-दूर तक प्रसारित हुआ। पदयात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने कहा कि यह यात्रा केवल एक मार्ग पर चलना नहीं, बल्कि गुरु बाबा के सत्य और समरसता के मार्ग पर समाज को एकजुट करने का एक पवित्र प्रयास है।
इस अवसर पर सतनामी समाज राजागुरु खुशवंत साहेब ने परम पूज्य गुरु घासीदास बाबा जी के सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि: बाबा जी का सत्य, समानता और समरसता का अमर संदेश आज के युग में भी उतना ही प्रासंगिक है उनका उपदेश मानवता को जाति-पाति और भेदभाव से ऊपर उठकर एकता के सूत्र में पिरोने का कार्य कर रहा है। यह पदयात्रा समाज में नई चेतना जागृत करने और समतामूलक समाज के निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम है। कसडोल में हुए इस भव्य स्वागत और जनसमर्थन ने पदयात्रियों में एक नई स्फूर्ति भर दी है। स्थानीय लोगों के इस अपार प्रेम ने यह सिद्ध कर दिया है कि सतनाम का संदेश आज भी जनमानस के हृदय में गहराई से बसा हुआ है।









