यह सिर्फ एक प्रतिमा का अपमान नहीं, बल्कि उन लाखों बलिदानियों की विरासत का अपमान है, जिन्होंने हमें यह आजाद भारत दिया….सुनील कुर्रे

(नीलकमल आजाद)

पलारी।छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार-भाटापारा जिले के पलारी विकासखंड के ग्राम जरवे में हुई एक शर्मनाक घटना ने पूरे समाज को स्तब्ध कर दिया है। जहाँ एक ओर हम अपने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करते हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ असामाजिक तत्वों ने उनकी प्रतिमा को कालिख पोतकर हमारे इतिहास और गौरव को धूमिल करने का घृणीत कार्य किया है।


यह कृत्य सिर्फ एक पत्थर की मूर्ति का अपमान नहीं, बल्कि उन महान आत्माओं का अनादर है, जिन्होंने हमें आज़ादी की साँस दी।


इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर पलारी क्षेत्र के ब्लाक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सुनील कुर्रे ने अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उनकी प्रतिक्रिया इस बात को दर्शाती है कि यह घटना कितनी गंभीर और संवेदनशील है।


 

कुर्रे ने कहा, “यह सिर्फ एक प्रतिमा का अपमान नहीं है, यह उन लाखों शहीदों के बलिदान का अपमान है जिन्होंने देश को गुलामी से मुक्त कराने के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। यह कृत्य हमारे राष्ट्र के सम्मान पर एक गहरा घाव है।”

 

उन्होंने आगे कहा कि, “ऐसी घिनौनी हरकतें हमारे समाज में नफरत और वैमनस्य को बढ़ावा देती हैं। जो लोग हमारे गौरवशाली इतिहास से छेड़छाड़ कर रहे हैं, वे देश के मूल्यों पर हमला कर रहे हैं। यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम अपने इतिहास और विरासत का सम्मान करना भूलते जा रहे हैं?”

 

सुनील कुर्रे ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए प्रशासन से त्वरित और कठोर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा, “दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह का दुस्साहस न करे।”

 

यह घटना हमें केवल प्रशासन पर ही निर्भर रहने की सीख नहीं देती, बल्कि समाज के हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी का एहसास कराती है। हमें अपने शहीदों और महापुरुषों की विरासत को सुरक्षित रखने के लिए एकजुट होना होगा।

 

स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाएं और स्मारक केवल कलाकृतियाँ नहीं, बल्कि शालिग्राम चंद्रवंशी , चोबीस राम चंद्रवंशी, झालू राम चंद्रवंशी ये तीनों हमारे प्रेरणा के स्रोत हैं। ये हमें याद दिलाते हैं कि स्वतंत्रता हमें आसानी से नहीं मिली है, बल्कि यह हमारे पूर्वजों के कठिन संघर्षों और बलिदान का परिणाम है।

कुर्रे की प्रतिक्रिया इस बात को उजागर करती है कि हमें सिर्फ विरोध प्रदर्शन तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपनी अगली पीढ़ी को हमारे इतिहास और वीर सपूतों के बलिदान के बारे में शिक्षित करना चाहिए। तभी हम ऐसी घटनाओं को रोक पाएंगे और एक ऐसे समाज का निर्माण कर पाएंगे, जहाँ हर नागरिक अपने राष्ट्र के गौरव का सम्मान करता है।