कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने नए आयकर अधिनियम, 2025 के तहत, 1 अप्रैल, 2026 से फॉर्म 15G और 15H को किया रिप्लेस अब इसकी जगह एक ही फॉर्म 121 भरा जाएगा

(प्रदीप गुप्ता)

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 के लागू होने के बाद एक नया कंप्लायंस फ्रेमवर्क पेश किया है। इसमें यह साफ़ किया गया है कि अब लंबे समय से इस्तेमाल हो रहे फॉर्म 15G और फॉर्म 15H के बजाय किसे फॉर्म 121 भरना होगा। यह बदलाव 1 अप्रैल, 2026 से लागू हो गया है।13 अप्रैल, 2026 को जारी EPFO सर्कुलर के अनुसार, “पुराने Income-tax Act, 1961 के खत्म होने और 1 अप्रैल, 2026 से लागू होने वाले Income-tax Act, 2025 के शुरू होने के साथ, बिना टैक्स काटे इनकम घोषित करने के संबंध में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। नए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत, पहले के Form 15G और Form 15H की जगह अब एक ही, एकीकृत फॉर्म 121 लाया गया है।”

फॉर्म 15G और 15H की जगह अब फॉर्म 121

जो टैक्सपेयर्स पहले Form 15G (60 साल से कम उम्र के लोगों के लिए) और Form 15H (सीनियर सिटिज़न्स के लिए) इस्तेमाल करते थे, वे अब एक ही यूनिफाइड डिक्लेरेशन Form 121 का इस्तेमाल करेंगे। ध्यान दें कि यह फ़ॉर्म उन टैक्सपेयर्स के लिए है जिनकी फ़ाइनेंशियल ईयर के लिए अनुमानित कुल टैक्स लायबिलिटी शून्य है, जिससे उन्हें कुछ इनकम पर ‘टैक्स एट सोर्स’ (TDS) की कटौती के बिना पेमेंट मिल सके।

EPFO ने साफ़ किया है कि Form 121 भरना सभी के लिए ज़रूरी नहीं है। यह सिर्फ़ उन लोगों के लिए है जो पात्रता की शर्तें पूरी करते हैं और TDS कटौती से बचना चाहते हैं।

फॉर्म 121 कौन फाइल कर सकता है ?

भारत में रहने वाले व्यक्ति (चाहे उनकी उम्र 60 साल से कम हो या 60 साल या उससे ज़्यादा), हिंदू अविभाजित परिवार (HUF), और अन्य खास योग्य संस्थाएँ जो तय शर्तों को पूरा करती हैं, उन्हें यह फ़ॉर्म भरना चाहिए। वहीं कंपनियां और फर्म Form 121 फाइल करने के लिए योग्य नहीं हैं। जो लोग भारत के निवासी नहीं हैं वे ये फॉर्म नहीं भर सकते।

फॉर्म 121 क्या है?

फॉर्म 121 एक सेल्फ़-डिक्लेरेशन फॉर्म है जिसे टैक्सपेयर्स यह कन्फ़र्म करने के लिए जमा करते हैं कि साल के लिए उनकी कुल इनकम टैक्सेबल लिमिट से कम रहेगी। एक बार जब यह फॉर्म पेमेंट करने वाले, जैसे कि EPFO, बैंकों या फ़ाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन्स को जमा कर दिया जाता है, तो एलिजिबल इनकम पर TDS नहीं काटा जा सकता है।

फॉर्म भरने के बाद RO (भुगतानकर्ता के तौर पर) हर मिले हुए Form 121 को एक Unique Identification Number (UIN) देगा। इस UIN में क्रम संख्या, टैक्स वर्ष और भुगतानकर्ता का TAN जैसे घटक शामिल होंगे।

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