पानी के बदले जहर क्यों?”बागबहार में नल-जल योजना की दर्दनाक तस्वीर

(बबलू तिवारी)
पत्थलगांव। जशपुर जिले के बागबहार पंचायत में नल-जल योजना का हाल देख हर जिम्मेदार इंसान का खून खौल उठेगा। जिन नलों से शुद्ध पानी आना था, वहाँ से अब बजबजाती नालियों का गंदा पानी लोगों के घरों में पहुँच रहा है! हर घर तक शुद्ध पानी का वादा था। लेकिन हकीकत में जो मिला, वह सिर्फ मायूसी, गुस्सा और डर है। पिछले वर्ष घनी आबादी वाले पत्थलगांव के बागबहार कस्बे की गलियों में जब लोग पाइपलाइन बिछते देख रहे थे, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि ये पाइप गंदी, बजबजाती नालियों के बीच से गुजरेंगी। नालियों की दुर्गंध के बीच पानी की लाइनें बिछी और जब सप्लाई शुरू हुई, तो घर-घर तक नाली का मिला पानी पहुँचने लगा। लोगों की चिंता गुस्से में बदली, विरोध की आवाजें उठीं, लेकिन जिम्मेदारों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।
सबसे बड़ा सवाल यही है कौन है वो ठेकेदार, जो इतनी लापरवाही कर गया? क्या उसके लिए इंसानी जान की कोई कीमत नहीं? और विभाग के अधिकारी, जिनके हस्ताक्षर के बिना काम पूरा नहीं माना जाता , क्या उन्होंने आँखें मूँद ली थीं? भौतिक सत्यापन, माप पुस्तिका, निरीक्षण क्या ये सब सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए?
अब सप्लाई भले ही फिलहाल रोक दी गई हो, लेकिन लोगों के दिलों में डर बस गया है। “कल हमारे बच्चों ने वही पानी पी लिया होता, क्या होता?” इस सवाल ने माँओं की नींद छीन ली है। बागबहार में अब एक ही मांग गूंज रही है ,उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई।
“किसने बागबहार की जनता को नाले का पानी पिलाने की साजिश रची?”
जिला कलेक्टर भले ही समय-समय पर योजना की समीक्षा करते रहे हों, लेकिन जमीनी सच्चाई यही है कि विभागीय लापरवाही ने एक सपने को डरावने सच में बदल दिया। सवाल यह भी है क्या भविष्य में लोग नल का पानी पीने से पहले सौ बार सोचेंगे?कसूरवार कौन? ठेकेदार, जिसने नालियों में से पाइप डलवा दी? या फिर पीएचई विभाग के अधिकारी, जिनकी निगरानी में यह काम हुआ? सवालों की फेहरिस्त लंबी है, लेकिन जवाब देने कोई सामने नहीं आ रहा। ठेकेदार ने कैसे इतनी बड़ी हिमाकत कर ली, और अधिकारियों ने क्यों आँखें मूँद लीं क्या सब मिले हुए थे?
बागबहार की जनता अब चुप नहीं बैठेगी। ऊँची कुर्सियों पर बैठे अफसरों को जवाब देना होगा। चाहे ठेकेदार हो या विभाग, इस लापरवाही का हिसाब अब देना पड़ेगा।