सावित्री बाई फूले शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला पामगढ़ में रजोशक्ति जागरूकता महाअभियान के तहत कार्यक्रम आयोजित, माहवारी जागरूकता पर स्वलिखित किताब का काजल कसेर ने किया छात्राओं को वितरण

(पंकज कुर्रे)


पामगढ़ । सावित्री बाई फूले शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला पामगढ़ में मासिक धर्म से संबंधित विस्तृत चर्चा का कार्यक्रम रखा गया, समाज एवं पर्यावरण कार्यकर्ता काजल कसेर ने छात्राओं को संबोधित किया एवं शारीरिक, मानसिक, सामाजिक चुनौतियों से निपटने का समाधान बताया l चर्चा के बाद उन्होंने माहवारी जागरुकता पर लिखी अपनी किताब छात्राओं में वितरित की l

 

कार्यक्रम में संस्था प्रमुख प्राचार्य श्रीमती शिल्पा दुबे, व्याख्याता रश्मि वर्मा, निर्मला रात्रि, लता रात्रे, लता सोनवानी, आरती लहरें, शेफाली, मोहन प्रमोद सिंह, ईश्वर खरे, विनोद भारती निधि सोनी, एवं समस्त स्टाफ साथ ही साथ शैक्षिक संबंध में निधि लता जायसवाल ने सहयोग दिया और जानकारी भी प्राप्त की, पूरे शाला परिवार की ओर से समाज सेविका को इसके अनेक कार्य के लिए बधाई दिया गया, हायर सेकेंडरी स्कूल पामगढ़ के समस्त बालिकाओं ने बड़ी ही शालीनता के साथ जानकारी को सुना एवं ग्रहण किया, उनके अलावा सहयोगी साथी के रूप में श्रीमती कुमारी कंसारी एवं स्कूल के शिक्षकगण उपस्थित रहे l इस सामाजिक जागरूकता के आयोजन व्यवस्था प्रभारी सोशल एक्टिविस्ट व AAP जिला सचिव विनय गुप्ता ने सामाजिक संदेश एवं आभार व्यक्त करते हुए कहा कि देश की आधी आबादी को रूढ़िवादी और अंधविश्वास की बेड़ियों को तोड़कर वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर नए समाज का सृजन करना है अधिक से अधिक प्रसार महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधित गंभीर विषयों पर इसी प्रकार के आयोजन होते रहना चाहिए जिससे कि सभी को इसका लाभ मिल सके।

मासिक धर्म पर बात करना क्यों जरूरी, इस पर काजल कहती हैं-

दुनिया में अरबों लोगों के लिए मासिक धर्म होना सबसे सामान्य चीजों में से एक है – फिर भी कई लोगों के लिए, यह अभी भी कलंक, गलतफहमी और खतरनाक गलत सूचना से घिरा हुआ है। मासिक धर्म से गुजरने वाली प्रत्येक महिला को अपने मासिक धर्म को सम्मान और गोपनीयता के साथ प्रबंधित करने की क्षमता होनी चाहिए लेकिन दुनिया भर में, लाखों लोगों को मासिक धर्म के दौरान आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच नहीं है , जैसे कि बहता पानी या मासिक धर्म उत्पाद। और लगभग 5 में से 1 व्यक्ति के पास अच्छा शौचालय नहीं है , जिससे मासिक धर्म को स्वच्छतापूर्वक प्रबंधित करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

 

स्कूल में इन मुद्दों पर चर्चा करने से मासिक धर्म की गरीबी के बारे में जागरूकता और समझ बढ़ाने में मदद मिलती है, तथा यह विभिन्न रूपों में हो सकती है, आखिरकार, जब तक हम खुलकर बात करना शुरू नहीं करते, तब तक हम वास्तविक परिवर्तन नहीं ला सकते। मासिक धर्म स्वच्छता प्रथाओं को समझने से छात्रों में सहानुभूति विकसित करने और आपके स्कूल में एक समावेशी और सहायक वातावरण बनाने में मदद मिल सकती है। युवाओं को मासिक धर्म के दौरान होने वाले शारीरिक और भावनात्मक बदलावों के बारे में शिक्षित करना ज़रूरी है। ऐसा करके, हम उन लड़कियों को, जिन्हें मासिक धर्म नहीं होता, अपने उन सहपाठियों के अनुभवों को बेहतर ढंग से समझने में मदद कर सकते हैं जिन्हें मासिक धर्म होता है।

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