कोसला धाम में श्री गायत्री महायज्ञ एवं सप्त पुराण कथा का भव्य आयोजन, हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे

(पंकज कुर्रे)

जांजगीर-चांपा/पामगढ़ । भगवान श्रीराम के ननिहाल एवं माता कौशल्या की पावन जन्मभूमि माने जाने वाले कोसला धाम में 22 मई से 29 मई तक श्री गायत्री महायज्ञ एवं सप्त पुराण यज्ञ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। आयोजन स्थल शनिदेव मंदिर परिसर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है।

श्री धाम वृंदावन से पधारे कथावाचक विष्णुकांत जी महाराज अपने श्रीमुख से भक्तों को सप्त पुराण की कथा का रसपान करा रहे हैं। कथा के अंतर्गत क्रमशः श्रीमद्भागवत कथा, श्रीमद् देवी भागवत कथा, श्री शिवपुराण कथा, श्री राम कथा, श्री हरिवंश महापुराण कथा, श्री भक्तमाल कथा एवं श्री विष्णु पुराण की कथा सुनाई जा रही है। आयोजन के अंतिम दिन 29 मई को हवन पूर्णाहुति एवं दिव्य भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

कथा आयोजन के लिए शनिदेव मंदिर के समीप भव्य पंडाल तैयार किया गया है। वहीं गायत्री महायज्ञ हेतु घास-फूस से विशेष यज्ञ कुटीर बनाई गई है, जहां प्रतिदिन सुबह 8 बजे से यजमानों द्वारा विधि-विधान से यज्ञ किया जा रहा है।

माता कौशल्या की जन्मभूमि ‘कोसला’ पर महराज का उद्बोधन

कथा के चौथे दिन श्रीराम कथा के दौरान व्यास पीठ से विष्णुकांत जी महाराज ने माता कौशल्या की जन्मभूमि ‘कोसला धाम’ को लेकर विशेष उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि अनेक पुराणों, शास्त्रों एवं रामायण में माता कौशल्या की जन्मभूमि कोसला का उल्लेख मिलता है। उन्होंने बताया कि दक्षिण कोसल के राजा भानुमंत की राजधानी कोसला थी तथा उनकी पुत्री भानुमती को कोसला से संबंध होने के कारण कौशल्या कहा गया।

महाराज ने क्षेत्रवासियों, जनप्रतिनिधियों, मीडिया तथा शासन-प्रशासन से माता कौशल्या जन्मभूमि के उत्थान हेतु एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि “जहां मां ने जन्म लिया, मंदिर वहीं बनाएंगे” संकल्प के साथ सभी को आगे आने की आवश्यकता है।

इस दौरान कोसला धामवासियों द्वारा विष्णुकांत जी महाराज को माता कौशल्या का चित्र भेंट कर सम्मानित किया गया। आयोजन में प्रतिदिन क्षेत्रभर से हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसाद की भी व्यवस्था की गई है।

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