दो दिवसीय कामबंद कर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं ने सौंपा ज्ञापन, 9 मार्च को विधानसभा घेराव की चेतावनी

(पंकज कुर्रे)

जांजगीर-चांपा । जिले की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर दो दिवसीय कामबंद आंदोलन करते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। जुझारू छत्तीसगढ़ आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सहायिका कल्याण संघ, जिला जांजगीर-चांपा के बैनर तले 26 एवं 27 फरवरी को जिला मुख्यालय में सामूहिक रूप से घर बैठकर विरोध प्रदर्शन किया गया। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो 9 मार्च 2026 को विधानसभा घेराव किया जाएगा।

संघ ने बताया कि प्रांतीय आह्वान पर छत्तीसगढ़ के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में दो दिवस काम बंद रखा गया। 27 फरवरी को प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री के नाम ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा गया।

कार्यकर्ताओं ने कहा कि देश में आईसीडीएस की स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं और महिला एवं बाल विकास विभाग गोल्डन जुबली ईयर मना रहा है। अमृतकाल में भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को सम्मानजनक वेतन और सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने बताया कि वे घर-घर, गांव-गांव और शहर-शहर तक महिला एवं बाल विकास की योजनाओं को पहुंचाने के साथ ही कोविड महामारी, निर्वाचन कार्य और अन्य शासकीय जिम्मेदारियों का भी निर्वहन करती रही हैं।

संघ के अनुसार, वर्तमान में केंद्र सरकार द्वारा कार्यकर्ताओं को मात्र 4500 रुपये और सहायिकाओं को 2250 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है, जिसे उन्होंने जीवनयापन के लिए अपर्याप्त बताया। वर्ष 2018 के बाद से केंद्र स्तर पर मानदेय में वृद्धि नहीं होने तथा राज्य सरकार द्वारा भी पिछले दो वर्षों में किसी प्रकार की बढ़ोतरी या सुविधा न दिए जाने पर नाराजगी जताई गई।

कार्यकर्ताओं ने कहा कि 50 वर्षों में शासकीयकरण, सामाजिक सुरक्षा, मासिक पेंशन, एकमुश्त ग्रेच्युटी, समूह बीमा, कैशलेस चिकित्सा सुविधा और पर्याप्त अवकाश जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। इन मांगों को लेकर देशभर के लगभग 28 लाख तथा छत्तीसगढ़ के करीब एक लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं में आक्रोश व्याप्त है।

प्रमुख मांगें

1. शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाए – शिक्षा कर्मी एवं पंचायत कर्मियों की तरह नीति बनाकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाए।

2. न्यूनतम वेतन लागू किया जाए – शासकीयकरण तक कार्यकर्ताओं को 26,000 रुपये तथा सहायिकाओं को 22,100 रुपये प्रतिमाह वेतन स्वीकृत किया जाए तथा मध्यप्रदेश की तर्ज पर प्रतिवर्ष 1,000 रुपये की वृद्धि की जाए।

3. सामाजिक सुरक्षा की गारंटी – सेवानिवृत्ति एवं आकस्मिक मृत्यु पर एकमुश्त ग्रेच्युटी/मासिक पेंशन, समूह बीमा तथा सामाजिक सुरक्षा के लिए ठोस नीति बनाई जाए।

संघ ने मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील करते हुए कहा कि यदि दो दिवस के भीतर ठोस पहल नहीं हुई तो 9 मार्च को विधानसभा घेराव कर आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा।

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