अंबेडकर चौक में तोड़फोड़ और बाबा साहब के अपमान का मामला: आरोपी के खिलाफ FIR दर्ज, पुलिस की त्वरित कार्रवाई

(पंकज कुर्रे)

अकलतरा/बम्हनीन । अकलतरा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत बम्हनीन में स्थित अंबेडकर चौक पर असामाजिक तत्वों द्वारा की गई तोड़फोड़ एवं संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के सम्मान को ठेस पहुंचाने की घटना सामने आई है। घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल बन गया, वहीं पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी के विरुद्ध मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

मिली जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत बम्हनीन के सरपंच पंकज मिरी ने अकलतरा थाना में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में बताया गया कि 13 जून की सुबह लगभग 6:15 बजे उन्हें फोन के माध्यम से सूचना मिली कि गांव के चौक में स्थापित बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के चारों ओर लगी स्टील रेलिंग को क्षतिग्रस्त कर दिया गया है।

घटना के संबंध में बताया गया कि सोनू (चाट विक्रेता) ने आरोपी को मौके पर रंगे हाथों पकड़ लिया था। उस समय वहां अभय धनवार, कमलेश धनवार एवं राजा धनवार मौजूद थे। सोनू द्वारा पूछताछ किए जाने पर राजा धनवार ने रेलिंग तोड़ने की बात स्वीकार की, जिसके बाद वह वहां से भाग गया।

मौके पर मौजूद कमलेश धनवार और अभय धनवार से पूछताछ करने पर उन्होंने बताया कि राजा धनवार उन्हें शराब पिलाकर वहां लेकर आया था। इसके बाद राजा धनवार गाली-गलौज करते हुए रेलिंग पर चढ़ गया, जिससे रेलिंग में लगा पाइप टूट गया। पाइप टूटने के बाद वह उसका मजाक उड़ाते हुए प्रतिमा को भी नुकसान पहुंचाने संबंधी बातें कर रहा था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अकलतरा थाना प्रभारी भास्कर शर्मा ने तत्काल संज्ञान लिया और पुलिस टीम को सक्रिय किया। जांच के दौरान मुख्य आरोपी की पहचान कर उसके विरुद्ध अपराध दर्ज किया गया। पुलिस द्वारा अपराध क्रमांक 0334/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 298 सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं में मामला पंजीबद्ध कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

घटना के बाद समाज के लोगों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए पुलिस प्रशासन की तत्परता की सराहना की है। स्थानीय नागरिकों और समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि देश के संविधान, समानता, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रतीक हैं। उनकी प्रतिमा या स्मारकों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ समाज की भावनाओं को आहत करती है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई आवश्यक है।

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