12 वर्षों में बदली भारत की विज्ञान गाथा, जैव अर्थव्यवस्था 190 अरब डॉलर पहुंची: जितेंद्र सिंह
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केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार को कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत के विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार परिदृश्य में अभूतपूर्व बदलाव आया है। जैव अर्थव्यवस्था के करीब 20 गुना विस्तार, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट ऐतिहासिक चंद्र लैंडिंग, अंतरिक्ष स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के तेज विकास, मौसम पूर्वानुमान में सुधार और रणनीतिक क्षेत्रों में स्वदेशी तकनीकों के विकास ने भारत की वैज्ञानिक क्षमता को नई ऊंचाई दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विज्ञान और प्रौद्योगिकी अब प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आम नागरिकों के जीवन और देश की विकास यात्रा का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं।
विज्ञान और तकनीक बनी विकास यात्रा का प्रमुख स्तंभ
नई दिल्ली स्थित सीएसआईआर मुख्यालय के एसएसबी सभागार में ‘विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार में परिवर्तनकारी विकास के 12 वर्ष’ विषय पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार के लगभग सभी प्रमुख कार्यक्रम विज्ञान और प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र से निकलने वाली उभरती तकनीकों से संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि नवाचार, वैश्विक प्रतिस्पर्धा, उद्योग और निजी क्षेत्र की भागीदारी पर जोर देने से स्वास्थ्य, कृषि, अंतरिक्ष, मौसम विज्ञान, अवसंरचना और ऊर्जा सहित कई क्षेत्रों में वैज्ञानिक उपलब्धियों को गति मिली है।
10 अरब डॉलर से 190 अरब डॉलर हुई जैव अर्थव्यवस्था
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की जैव अर्थव्यवस्था 2014 में करीब 10 अरब डॉलर की थी, जो अब बढ़कर 190 अरब डॉलर से अधिक हो गई है। सरकार का लक्ष्य इसे 2030 तक 300 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा, जीनोमिक्स, निदान और जैव औषधि विज्ञान में स्वदेशी नवाचारों के जरिए भारत वैश्विक जैव प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में उभर रहा है। बायोई3 ढांचे जैसी नीतियां इस क्षेत्र को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
सीएआर-टी सेल थेरेपी और जीनोमिक्स में प्रगति
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत ने अगली पीढ़ी के एंटीबायोटिक्स, किफायती सीएआर-टी सेल थेरेपी, जीनोमिक्स और सटीक चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति की है। देश में विकसित हो रही तकनीकें घरेलू स्वास्थ्य चुनौतियों के साथ-साथ वैश्विक महत्व की बीमारियों और विकारों के समाधान में भी योगदान दे रही हैं।
सीएसआईआर का उद्योग और किसानों से बढ़ा जुड़ाव
जितेंद्र सिंह ने कहा कि सीएसआईआर में भी बड़ा बदलाव आया है और वैज्ञानिक संस्थान अब उद्योग, स्टार्टअप, किसानों तथा स्थानीय समुदायों के साथ पहले की तुलना में अधिक निकटता से काम कर रहे हैं। उन्होंने अरोमा मिशन का उदाहरण देते हुए कहा कि इस पहल ने नए आजीविका अवसर पैदा किए हैं और खासकर हिमालयी क्षेत्रों के हजारों किसानों को उच्च मूल्य वाली कृषि से जुड़ने में मदद मिली है।
स्टील कचरे से बनी सड़क तकनीक का उदाहरण
मंत्री ने स्टील के कचरे से सड़क निर्माण की तकनीक का उल्लेख करते हुए कहा कि विज्ञान ने औद्योगिक कचरे को मूल्यवान राष्ट्रीय संसाधन में बदलने का रास्ता दिखाया है। इस तकनीक से बनी सड़कों में बेहतर टिकाऊपन, कम रखरखाव लागत और अधिक लागत प्रभावशीलता देखने को मिली है। उन्होंने कहा कि ऐसे उदाहरण बताते हैं कि वैज्ञानिक नवाचार सीधे आर्थिक विकास और सतत विकास में योगदान कर सकते हैं।
17 से बढ़कर 50 हुए मौसम रडार
मौसम एवं जलवायु सेवाओं में बदलाव का उल्लेख करते हुए जितेंद्र सिंह ने भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के कायापलट को पिछले 12 वर्षों की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल किया। उन्होंने कहा कि 2014 में देश में सिर्फ 17 मौसम रडार थे, जबकि अब इनकी संख्या करीब 50 हो गई है। मिशन मौसम के तहत 50 और रडार लगाने की योजना है। इसके साथ बिजली गिरने का पता लगाने वाली प्रणालियों, पूर्वानुमान नेटवर्क और वर्षा निगरानी अवसंरचना का भी विस्तार हुआ है।
300 से बढ़कर 1,700 स्थानों तक पहुंचा मौसम पूर्वानुमान
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मौसम पूर्वानुमान सेवाओं का दायरा करीब 300 शहरों से बढ़कर लगभग 1,700 स्थानों तक हो गया है। नाउकास्ट जैसी आधुनिक सेवाएं स्थानीय स्तर पर अल्पकालिक और अधिक सटीक पूर्वानुमान उपलब्ध करा रही हैं। इससे नागरिकों, किसानों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को समय रहते बेहतर निर्णय लेने में मदद मिल रही है। उन्होंने कहा कि मौसम सेवाओं में सुधार से भारत की आपदा प्रबंधन क्षमता भी मजबूत हुई है।
अंतरिक्ष स्टार्टअप एकल अंक से बढ़कर 400 से अधिक
भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में बदलाव का उल्लेख करते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि सुधारों के बाद अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र में तेज विस्तार हुआ है। अंतरिक्ष स्टार्टअप की संख्या पहले एकल अंक में थी, जो अब 400 से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि करीब 8 अरब डॉलर की भारतीय अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के आने वाले वर्षों में 45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। अंतरिक्ष क्षेत्र अब नवाचार और आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण चालक बन रहा है।
चंद्रयान-3 ने दुनिया के सामने दिखाई क्षमता
चंद्रयान-3 की सफलता को भारत की वैज्ञानिक क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण बताते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सफलतापूर्वक लैंडिंग करने वाला पहला देश बना। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने, संस्थागत सुधारों और उद्योग सहयोग ने नवाचार की गति तेज की है और भारतीय उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं।
2035 तक अंतरिक्ष स्टेशन, 2040 तक चंद्रमा पर लैंडिंग का लक्ष्य
जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत अब भविष्य के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इनमें 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना और 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय लैंडिंग का लक्ष्य शामिल है। इसके साथ ही भविष्य के मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशनों के लिए भी तैयारियां जारी हैं।
परमाणु ऊर्जा में निजी भागीदारी से बढ़ेंगे अवसर
केंद्रीय मंत्री ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने को हाल के वर्षों के महत्वपूर्ण नीतिगत सुधारों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि इस फैसले से देश और विदेश में काफी रुचि पैदा हुई है। इससे रणनीतिक ऊर्जा क्षेत्र में निवेश, नवाचार और क्षमता निर्माण को गति मिलने की उम्मीद है।
डीप ओशन मिशन और स्वदेशी समुद्री तकनीकों पर जोर
सीएसआईआर की महानिदेशक और डीएसआईआर एवं पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और सीएसआईआर की प्रमुख उपलब्धियों की जानकारी दी। इनमें मिशन मौसम के तहत मौसम अवलोकन प्रणालियों का विस्तार, डीप ओशन मिशन में प्रगति तथा मत्स्य 6000 और वराह जैसी स्वदेशी गहरे समुद्र की तकनीकों का विकास शामिल है। कृषि, स्वास्थ्य, अवसंरचना, ऊर्जा और ग्रामीण विकास में तकनीकों की तैनाती का भी उल्लेख किया गया।
क्वांटम मिशन से सुपरकंप्यूटिंग तक कई पहल
जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ. राजेश गोखले ने जैव प्रौद्योगिकी और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभागों की उपलब्धियों को सामने रखा। इनमें बायोई3 नीति का कार्यान्वयन, स्टार्टअप और नवाचार नेटवर्क का विस्तार, जीनोमिक्स तथा स्वास्थ्य तकनीकों में प्रगति के साथ अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ), राष्ट्रीय क्वांटम मिशन, अनुसंधान विकास और नवाचार (आरडीआई) कोष, राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन और राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति जैसी पहलें शामिल हैं।
विकसित भारत 2047 की दिशा में विज्ञान की भूमिका
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियां बताती हैं कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार भारत के वैश्विक ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में उभरने के प्रमुख कारक बन गए हैं। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक प्रगति से रणनीतिक और तकनीकी क्षमताएं मजबूत होने के साथ नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार, रोजगार और विकास के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत विज्ञान और नवाचार की ताकत के साथ विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है।





