मौसम परिवर्तन से किट एवं बीमारी का प्रकोप

बिलाईगढ़ । ब्लॉक बिलाईगढ़ के अंतर्गत धान की फसल में विभिन्न प्रकार के कीट एवं बीमारी का प्रकोप मौसम में हो रहे परिवर्तन की वजह से आर्द्रता बढ़ने से बढ़ रहा है, जिसमें प्रमुख रूप से तनाछेदक कीट, शीथरॉट,रेड वर्म (लाल कीड़ा) शीथ ब्लाइट प्रमुख है।


आशुतोष श्रीवास्तव उप संचालक कृषि सारंगढ़ बिलाईगढ़ आदेशानुसार कृष्ण कुमार साहू वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी द्वारा कीट बीमारी नियंत्रण के लिए ग्राम नगरदा मे कृषकों के साथ खेतों का भ्रमण कर कीट व्याधि का अवलोकन किया गया भ्रमण दौरान उपस्थित किसानों एवं अन्य कृषकों को सलाह एवं मार्गदर्शन दिया। किसान भाई कीट की पहचान कर सकते है, तनाछेदक कीट की इल्ली तने की गांठ में छेद करके तने के अंदर घुसकर मुख्य तने को अंदर घुस कर तने को खाती है, जिस कारण बाहर से सूखा पौधा दिखाई देता है। इसके नियंत्रण के लिए कर्टाप हाइड्राक्लोराइड 4 जी 8 कि.ग्रा. की दर से खेत में भुरकाव करें या कोरन्टा नीलीप्लोर 18.5 ई०सी० 1/2 मि.ली. प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें। शीथरॉट एवं शीटब्लास्ट में गबोट के निचले हिस्से पर हल्के भूरे रंग के धब्बे बनते हैं एवं पत्तियां आपस में सड़ने लगते हैं ,। इसका नियंत्रण के लिए हेक्साकोनाजोल 5 प्रतिशत + वेलिडमाईसीन 3 प्रतिशत को 2 एम ए प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें। रेड वर्म (लाल कीड़ा) इससे पौधा की जड़ की वृद्धि कम होती है जिससे पौधे की बढ़वार रुक जाती है,इसका नियंत्रण एमिडक्लोपिड 70 प्रतिशत की 60 ग्राम मात्रा रेत के साथ मिलकर छिड़काव करें। रोग या बीमारी पूरी तरह से नियंत्रित नहीं होने पर कीटनाशक , फफूंदनाशक का छिड़काव या भुरकाव को 10 दिन के अंतराल से पुनः करें जिससे कीट बीमारी का पूर्ण नियंत्रण किया जा सके। एवं किसान भाई शुरुआत में ही हैवी कीटनाशक फफूंदीनाशक का उपयोग न करे।
भ्रमण दौरान कृषि विभाग से मनोज कुमार क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी ,प्रकाश कुमार थवाईत ब्लॉक टेक्नोलॉजी मैनेजर,कृषक भरत लाल साहू,मनोहर लाल टंडन,हीरामन चेलक उपस्थित रहे।