20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र, सरकार-विपक्ष के बीच घमासान तय, सांसदों के लिए सख्त एडवाइजरी जारी

नई दिल्ली। देश की संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान केंद्र सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक सदन में पेश करने की तैयारी में है, जिनका असर चुनावी व्यवस्था, आरक्षण और प्रशासनिक ढांचे पर पड़ सकता है। वहीं विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, NEET पेपर लीक और अन्य जनहित के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। वहीं सत्र शुरू होने से पहले लोकसभा सचिवालय ने सांसदों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है। इसमें संसद परिसर के भीतर सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखने के उद्देश्य से कई आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।


स्मार्ट डिवाइस को लेकर सावधानी

सचिवालय ने कहा है कि आजकल बाजार में उपलब्ध स्मार्ट ग्लास, पेन कैमरा, स्मार्ट वॉच और अन्य रिकॉर्डिंग क्षमता वाले उपकरण सुरक्षा और गोपनीयता के लिए चुनौती बन सकते हैं। ऐसे उपकरण संसदीय कार्यवाही की गोपनीयता और विशेषाधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए सांसदों से इनका जिम्मेदारी से उपयोग करने का अनुरोध किया गया है।

संसद परिसर में इन गतिविधियों से बचने की सलाह

लोकसभा सचिवालय ने सांसदों से अपील की है कि वे संसद भवन परिसर में

  • धरना, प्रदर्शन या नारेबाजी न करें।
  • पोस्टर, बैनर और तख्तियां लेकर न आएं।
  • AI से तैयार आपत्तिजनक तस्वीरों या नारों का प्रदर्शन न करें।
  • किसी भी प्रकार के धार्मिक आयोजन या अनशन से परहेज करें।
  • हथियार, लाठी, तलवार, भाला या अन्य प्रतिबंधित वस्तुएं परिसर में न लाएं।

सचिवालय का कहना है कि इन निर्देशों का उद्देश्य संसद परिसर में आवागमन सुचारु रखना और सदन की कार्यवाही बिना किसी बाधा के संचालित करना है।

पहले भी बाधित होती रही है कार्यवाही

पिछले कई संसदीय सत्रों में विरोध-प्रदर्शन, नारेबाजी और पोस्टरबाजी के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार प्रभावित हुई थी। कई मौकों पर हंगामे के चलते कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी थी। बजट सत्र के दौरान निलंबित सांसदों द्वारा संसद परिसर में किए गए विरोध प्रदर्शन का भी उल्लेख किया गया है। इस बार भी सरकार और विपक्ष के बीच कई अहम मुद्दों पर आमने-सामने होने की संभावना है। ऐसे में मानसून सत्र के हंगामेदार रहने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं।