स्मार्ट मीटर से नहीं बढ़ता बिजली बिल, ज्यादा खपत और टैरिफ स्लैब हैं मुख्य वजह: बिजली विभाग

रायपुर। स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर उपभोक्ताओं के बीच फैल रही भ्रांतियों को दूर करते हुए बिजली विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्मार्ट मीटर बिजली बिल नहीं बढ़ाता बल्कि केवल वास्तविक बिजली खपत के आधार पर सटीक बिल तैयार करता है। विभाग के अनुसार यदि किसी उपभोक्ता का बिल बढ़ा है, तो इसका कारण बिजली की अधिक खपत और उच्च टैरिफ स्लैब में पहुंचना है, न कि स्मार्ट मीटर।


विभाग ने बताया कि स्मार्ट मीटर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उपभोक्ता ‘मोर बिजली’ ऐप के माध्यम से हर आधे घंटे की बिजली खपत देख सकते हैं। इससे यह पता लगाया जा सकता है कि कौन-से विद्युत उपकरण अधिक बिजली खर्च कर रहे हैं और खपत कम करने के लिए समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।

बिजली विभाग के अनुसार प्रदेश में बिजली दरें निर्धारित स्लैब के आधार पर लागू होती हैं। 0 से 100 यूनिट तक 4.40 रुपये,101 से 200 यूनिट, तक 4.50 रुपये, 201 से 400 यूनिट तक 6 रुपये, 401 से 600 यूनिट तक 7 रुपये और 600 यूनिट से अधिक खपत होने पर 8.80 रुपये प्रति यूनिट की दर लागू होती है। ऐसे में जैसे ही बिजली की खपत अगले स्लैब में पहुंचती है, बिल स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है।

विभाग ने बताया कि अप्रैल, मई और जून की भीषण गर्मी के दौरान एसी, कूलर और अन्य विद्युत उपकरणों के अधिक उपयोग के कारण अधिकांश घरों में बिजली खपत बढ़ी, जिससे कई उपभोक्ताओं के बिल भी अधिक आए। यह पूरी तरह मौसम और बिजली उपयोग से जुड़ी स्थिति है।

स्मार्ट मीटर के जरिए उपभोक्ता अपनी मासिक खपत पर लगातार नजर रख सकते हैं और उसे 400 यूनिट से कम रखने की योजना बना सकते हैं, जिससे राज्य सरकार की हाफ बिजली योजना का लाभ मिलता रहे। यदि खपत 400 यूनिट से अधिक हो जाती है, तो योजना का लाभ प्रभावित होने से बिल बढ़ सकता है।

बिजली विभाग ने बताया कि स्मार्ट मीटर से जुड़ी अधिकांश शिकायतों की जांच में मीटर सही पाए गए हैं। किसी भी शिकायत की स्थिति में उपभोक्ता 1912 हेल्पलाइन पर संपर्क कर सकते हैं। विभाग ने लोगों से स्मार्ट मीटर और मोर बिजली ऐप का अधिक से अधिक उपयोग करने, ऊर्जा संरक्षण अपनाने तथा प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाकर बिजली बिल कम करने की अपील की है।

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