शिक्षक दिवस विशेष: सेवानिवृत्त के बाद भी बच्चों को पढ़ा रहे मांडले, बने गांव का गुरु, माध्यमिक विद्यालय सलोनी में शिक्षा दान के प्रति दिखा समर्पण, सेवा भाव से शिक्षा दान करने वाले शिक्षक चंद्र भुवन मांडले का अनमोल योगदान

(शेखर वर्मा)

पलारी। गुरु वह व्यक्ति होता है, जो न केवल ज्ञान का संचार करता है, बल्कि अपने छात्रों के जीवन को भी संवारता है। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है पलारी ब्लॉक के ग्राम सलोनी के शिक्षक चंद्र भुवन मांडले की, जिन्होंने 26 सालों तक एक ही गांव में शिक्षा का दीप जलाए रखा और सेवानिवृत्ति के बाद भी अपने सेवा भाव को नहीं छोड़ा। वे 6 किमी दूर से आकर इस स्कूल में निशुल्क पढ़ाते हैं यहां तक कि अवकाश के दिनों में भी वे बच्चों को पढ़ाते हैं। चंद्रभुवन मांडले ने 1998 में ग्राम सलोनी के प्राथमिक शाला में बतौर शिक्षक अपनी यात्रा शुरू की थी। उस समय दूरस्थ और अविकसित गांवों में जाकर पढ़ाना कोई आसान काम नहीं था। लेकिन मांडले ने इस चुनौती को न केवल स्वीकार किया, बल्कि अपने समर्पण और निष्ठा से इस गांव को अपना परिवार बना लिया। उन्होंने दिन-रात बच्चों की शिक्षा के लिए काम किया और उन्हें जीवन की सच्ची दिशा दिखाई।

 एक शिक्षक कभी रिटायर नहीं होता: मांडले…

31 जुलाई 2024 को चंद्र भुवन मांडले ने अपने सेवा के अंतिम दिन के रूप में स्कूल में अपनी नौकरी को अलविदा कहा। लेकिन उनके दिल में सेवा और शिक्षा का जुनून इतना प्रबल है कि सेवानिवृत्ति के बाद भी वे स्कूल के बच्चों को पढ़ाना जारी रखे हुए हैं। मांडले का मानना है कि एक सच्चा शिक्षक कभी रिटायर नहीं होता, बल्कि वह जीवनभर अपने ज्ञान का प्रकाश फैलाता है।

 गांव के बच्चों के साथ गहरा रिश्ता…

शिक्षक माडले का गांव स्कूल से 6 किलोमीटर दूर है, लेकिन उन्होंने कभी इस दूरी को अपनी सेवा में बाधा नहीं बनने दिया। जब अन्य शिक्षक इस गांव में आने से हिचकिचाते थे, तब मांडले ने इस गांव को चुना और आज उनकी निष्ठा और सेवा के कारण गांव के बच्चों के साथ उनके परिवार जैसा रिश्ता बन चुका है। वे बच्चों को न केवल किताबों का ज्ञान देते हैं, बल्कि उन्हें जीवन के मूल्यों और सिद्धांतों से भी अवगत कराते हैं।

 समर्पण और निष्ठा का सम्मान, देवेंद्र डंडी गुरुजी…

वही स्कूल के समन्वयक देवेंद्र डंडी ने कहा कि आज शिक्षक दिवस के इस विशेष अवसर पर, हम शिक्षक चंद्र भुवन मांडले जैसे समर्पित और निष्ठावान शिक्षकों का सम्मान करते हैं, जो जीवनभर शिक्षा की मशाल जलाए रखते हैं और समाज को उज्जवल भविष्य की ओर अग्रसर करते उन्होंने कहा कि आज शिक्षा को लोग व्यापार बना चुके हैं मगर ऐसे में वे एक दुरस्थ में निस्वार्थ भाव से रिटायर्ड होने के बाद भी बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं ये उनकी बच्चों और शिक्षा के प्रति समर्पण है।

 

 

 






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