धार्मिक नगरी शिवरीनारायण में रामवन गमन पथ का स्वागत द्वार अधर में, हादसे को न्योता दे रहा जर्जर ढांचा
(मदन खांडेकर)
शिवरीनारायण। धार्मिक नगरी शिवरीनारायण में रामवन गमन पथ मार्ग पर बनाया जा रहा स्वागत द्वार पिछले कई वर्षों से अधूरा पड़ा हुआ है। निर्माण कार्य पूरा नहीं होने और लंबे समय से रखरखाव के अभाव में अब यह स्वागत द्वार जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुका है। आलम यह है कि स्वागत द्वार में लगाए गए पत्थर और अन्य निर्माण सामग्री अब राहगीरों के लिए खतरा बनते नजर आ रहे हैं।

स्वागत द्वार के अधूरे निर्माण के कारण सड़क का हिस्सा भी संकरा हो गया है। प्रतिदिन इस मार्ग से बड़ी संख्या में छोटे-बड़े वाहन और पैदल राहगीरों का आवागमन होता है। ऐसे में सड़क पर आवागमन के दौरान लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं स्वागत द्वार की मौजूदा स्थिति को देखते हुए कभी भी पत्थर या निर्माण का कोई हिस्सा नीचे गिरने की आशंका बनी हुई है।

कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
स्थानीय लोगों के मुताबिक स्वागत द्वार काफी समय से अधूरा पड़ा है। समय बीतने के साथ इसकी स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। यदि किसी समय स्वागत द्वार का पत्थर या कोई भारी हिस्सा अचानक नीचे गिर गया, तो राहगीरों की जान पर बन सकती है। खासकर व्यस्त समय में यहां बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
अधूरे निर्माण से बढ़ी परेशानी
राम वन गमन पथ से जुड़ा यह मार्ग धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। शिवरीनारायण में देश-प्रदेश से श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। ऐसे महत्वपूर्ण मार्ग पर वर्षों से स्वागत द्वार का अधूरा पड़ा रहना जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि स्वागत द्वार का निर्माण जल्द पूरा कराने के साथ-साथ जर्जर हिस्सों की तत्काल मरम्मत कराई जानी चाहिए, ताकि किसी अप्रिय घटना को टाला जा सके।
जिम्मेदार अधिकारी मौन, कब होगी कार्रवाई सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कई वर्षों से अधूरा पड़ा यह स्वागत द्वार कब पूरा होगा? क्या जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं लोगों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन को तत्काल मौके का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।
अब देखना होगा कि वर्षों से अधूरे पड़े इस स्वागत द्वार को लेकर जिम्मेदार अधिकारी कब जागते हैं और निर्माण कार्य पूरा कराने के साथ-साथ जर्जर हिस्से को सुरक्षित करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।
फिलहाल अधूरा स्वागत द्वार, संकरा रास्ता और गिरते पत्थरों का खतरा तीनों मिलकर राहगीरों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।








