बिना कोरम लाखों की निकासी का आरोप! कुटराबोड़ पंचायत में सरपंच-सचिव पर वित्तीय गड़बड़ी का गंभीर मामला
(पंकज कुर्रे)
जांजगीर-चांपा । जिले के पामगढ़ जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत कुटराबोड़ में वित्तीय अनियमितता का बड़ा मामला सामने आया है। पंचायत के सरपंच और सचिव पर बिना कोरम के लाखों रुपए निकालने और खर्च करने का गंभीर आरोप लगा है। खास बात यह है कि इस पूरे मामले की जानकारी खुद पंचायत के पंचों को भी नहीं थी, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश का माहौल बन गया है।
बिना सहमति निकाले गए लाखों रुपए
शिकायत के अनुसार, ग्राम पंचायत कुटराबोड़ के सरपंच पुष्कर दिनकर और सचिव ने निर्वाचित पंचों की सहमति के बिना ही विभिन्न विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपए की राशि आहरित कर खर्च कर दी। पंचों का आरोप है कि पंचायत बैठकों में न तो उन्हें बुलाया गया और न ही किसी प्रकार की जानकारी दी गई।
कोरम के बिना पास किए गए प्रस्ताव
मामले में यह भी सामने आया है कि पंचायत बैठकों में आवश्यक कोरम पूरा किए बिना ही प्रस्ताव पारित किए गए। नियमों के विपरीत वित्तीय स्वीकृति देकर शासकीय राशि का उपयोग किया गया, जो कि पंचायत नियमों का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है। जानकारों के मुताबिक, कोरम के बिना पारित सभी प्रस्ताव कानूनी रूप से अवैध माने जाते हैं।
जनदर्शन में पहुंची शिकायत, कलेक्टर ने लिया संज्ञान
इस पूरे मामले को लेकर पंचायत के पंच मंगलवार को आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम में पहुंचे और कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंप दी। कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए पामगढ़ एसडीएम को प्रेषित कर दिया है।
कानून के दायरे में गंभीर मामला
यह मामला छत्तीसगढ़ पंचायती राज अधिनियम 1993 की धारा 40 एवं 92 के अंतर्गत गंभीर वित्तीय अनियमितता और शासकीय निधि के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो संबंधित सरपंच और सचिव पर कड़ी कानूनी कार्रवाई संभव है।
पंचों की प्रमुख मांगें
पंचों ने प्रशासन से निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए कई बिंदु उठाए हैं—
पंचायत के सभी वित्तीय लेनदेन की जांच
कैश बुक, मस्टर रोल, वाउचर और बैंक स्टेटमेंट की गहन जांच
अवैध प्रस्तावों को निरस्त घोषित करना
दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई
पंचायत निधि की हानि की वसूली
जांच पूरी होने तक वित्तीय अधिकारों का निलंबन
ग्रामीणों में बढ़ा आक्रोश, कार्रवाई की मांग तेज
मामले के सामने आने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस तरह की अनियमितताओं पर रोक नहीं लगी, तो पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी तेजी और सख्ती से कार्रवाई करता है।


