सोनाखान वन दफ्तर में शराब-मुर्गा पार्टी के बाद ‘सोने की चैन’ विवाद: बिना सबूत 4 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को हटाने पर उठे सवाल

मदन खाण्डेकर

गिधौरी। वन परिक्षेत्र सोनाखान कार्यालय इन दिनों एक विवाद को लेकर सुर्खियों में है। यहां कथित तौर पर शराब और मुर्गा पार्टी के बाद उप वनमंडलाधिकारी (SDO) की सोने की चैन गुम होने के मामले में चार दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को काम से हटाए जाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रभावित कर्मचारियों का आरोप है कि बिना किसी ठोस सबूत और बिना पुलिस जांच पूरी हुए उन्हें पिछले तीन महीनों से कार्य से बाहर कर दिया गया है, जिससे उनके परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, कर्मचारियों ने मोहतरा में आयोजित सुशासन त्यौहार में आवेदन देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और उन्हें पुनः कार्य पर रखने की मांग की है। आवेदन में उल्लेख किया गया है कि दिनांक 25 जनवरी 2026 की रात परिक्षेत्र अधिकारी सोनाखान के आवास गृह कसडोल में देर रात तक पार्टी आयोजित की गई थी। आरोप है कि पार्टी में उप वनमंडलाधिकारी अनिल वर्मा, प्रशिक्षु एसीएफ गुलशन साहू, प्रशिक्षु रेंजर दीपक कुमार कौशिक सहित विभाग के कई कर्मचारी मौजूद थे। पार्टी के दौरान शराब सेवन, बाजा बजाकर नाच-गाना और बकरा-मुर्गा भोज होने की बात भी आवेदन में लिखी गई है।

कर्मचारियों के मुताबिक, पार्टी समाप्त होने के बाद एसडीओ की सोने की चैन गायब होने की बात सामने आई, जिसके बाद शक के आधार पर दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी मनोज यादव, सुबे लाल प्रधान, राजेश सेन और अनंत कुमार यादव को काम से हटा दिया गया। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें बिना किसी सबूत के चोरी का आरोपी बनाया जा रहा है, जबकि पुलिस में शिकायत दिए जाने के बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।

आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि कर्मचारियों पर दबाव बनाकर प्रताड़ित किया जा रहा है और तांत्रिक विद्या जैसी बातों के जरिए मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। कर्मचारियों ने कहा कि उन्होंने कोई चोरी नहीं की है और निष्पक्ष जांच होने पर सच्चाई सामने आ जाएगी।

चारों कर्मचारियों ने बताया कि उस रात पार्टी में करीब 12 लोग मौजूद थे। ऐसे में केवल चार लोगों पर ही शक जताकर कार्रवाई करना कई सवाल खड़े करता है। कर्मचारियों ने यह भी कहा कि संभव है कि चैन कहीं गुम हो गई हो या अत्यधिक नशे की स्थिति में अधिकारी स्वयं भूल गए हों कि चैन कहां रखी गई थी। उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

इधर, इस मामले में वन विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वन विभाग कार्यालय परिसर में शराब पार्टी हुई है तो इसकी भी जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।

फिलहाल, चारों कर्मचारी लगातार सोनाखान कार्यालय, डीएफओ कार्यालय और कलेक्टर कार्यालय में आवेदन देकर न्याय की मांग कर रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या प्रभावित कर्मचारियों को राहत मिल पाती है।

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