1,000 की मदद बनी प्रीति के सपनों की ताकत, महतारी वंदन से सिलाई सीखकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा कदम

00 30वीं किस्त के साथ खाते में पहुंचे 30 हजार; बच्चों की पढ़ाई संभालने के साथ हुनर को आजीविका बनाने की तैयारी
रायपुर। आज जब महिलाएं परिवार की जिम्मेदारियों के साथ अपने हुनर को रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं, ऐसे समय में महतारी वंदन योजना महिलाओं के लिए आर्थिक संबल का प्रभावी माध्यम बन रही है। योजना के तहत हर माह मिलने वाली 1,000 की सहायता ने मनेन्द्रगढ़ विकासखंड की निवासी प्रीति साह को भी अपने सपनों को आकार देने का अवसर दिया है। 07 अगस्त 2026 को महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त जारी होने के साथ प्रीति साह को अब तक कुल 30,000 की सहायता प्राप्त हो चुकी है। 30वीं किस्त मिलने पर उनके चेहरे पर खुशी है। प्रीति बताती हैं कि हर महीने मिलने वाली राशि परिवार की जरूरतों में सहयोग करने के साथ उन्हें अपने लिए कुछ नया सीखने और भविष्य में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दे रही है।
आर्थिक सहायता से सीखा सिलाई का हुनर
प्रीति साह ने बताया कि वे योजना से मिलने वाली 1,000 की राशि का उपयोग सिलाई सीखने के साथ-साथ बच्चों की छोटी-मोटी जरूरतों और उनकी पढ़ाई से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने में करती हैं। सिलाई सीखने के लिए आर्थिक सहायता मिलने से वे अपने हुनर को निखार रही हैं।उनका लक्ष्य है कि सिलाई का हुनर पूरी तरह सीखने के बाद इसे आगे चलकर आजीविका का साधन बनाया जाए। इस दिशा में महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित सहायता उनके लिए शुरुआती पूंजी और प्रोत्साहन दोनों का काम कर रही है। प्रीति कहती हैं कि अपने लिए कोई नया कौशल सीखने का अवसर मिलना उनके लिए बड़ी बात है। आज वे सिलाई सीख रही हैं और आने वाले समय में इसी हुनर के माध्यम से अपनी आय का जरिया तैयार करने का सपना देख रही हैं।
बच्चों की पढ़ाई में भी बन रही भागीदार
परिवार की जिम्मेदारियों के बीच बच्चों की शिक्षा प्रीति की प्राथमिकता है। वे बताती हैं कि हर महीने मिलने वाली राशि से बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी छोटी-मोटी जरूरतों को पूरा करने में काफी मदद मिलती है। कॉपी-किताब और अन्य आवश्यकताओं जैसे छोटे खर्चों में यह राशि परिवार के बजट को सहारा देती है। इस तरह महतारी वंदन योजना की सहायता प्रीति के लिए दोहरी भूमिका निभा रही है एक और वह अपने कौशल को मजबूत कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर बच्चों की शिक्षा में भी आर्थिक सहयोग दे रही हैं।
सहायता से सिर्फ जरूरत नहीं, भविष्य भी संवार रही हूं


प्रीति साह के लिए योजना की मासिक राशि अब केवल घरेलू खर्च में सहयोग तक सीमित नहीं है। वे इसका उपयोग अपने भविष्य की नींव मजबूत करने के लिए भी कर रही हैं। सिलाई सीखने का निर्णय उनके आत्मनिर्भर बनने की इच्छा को दर्शाता है। वे बताती हैं कि नियमित रूप से मिलने वाली आर्थिक सहायता से उन्हें यह भरोसा मिला है कि वे अपनी जिम्मेदारियों के साथ अपने लिए भी कुछ कर सकती हैं। बच्चों की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ अपने हुनर को विकसित करना उनके लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाला अनुभव है।

30वीं किस्त पर चेहरे पर खुशी, मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त जारी होने पर प्रीति साह ने खुशी जाहिर की। अब तक प्राप्त 30,000 की राशि उनके लिए लगातार मिल रहे आर्थिक सहयोग का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि योजना से महिलाओं को अपनी जरूरतों को पूरा करने के साथ कुछ नया सीखने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है। प्रीति साह ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की इस पहल से महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनने में सहायता मिल रही है। उन्होंने 30वीं किस्त जारी होने पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को धन्यवाद दिया। प्रीति साह की कहानी बताती है कि आर्थिक सशक्तिकरण की शुरुआत हमेशा बड़ी पूंजी से नहीं होती। कभी-कभी नियमित मिलने वाली छोटी-सी सहायता भी किसी महिला के भीतर छिपे हुनर को अवसर देती है। आज प्रीति अपने बच्चों की जरूरतों में सहयोग करते हुए सिलाई सीख रही हैं और कल इसी हुनर को अपनी आजीविका बनाने की दिशा में बढ़ रही हैं-यही महतारी वंदन योजना की सार्थकता की एक जीवंत तस्वीर है।

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